*■खेतों में धान रोपाई के लिए पौधे तैयार कर क्षेत्र के अन्नदाता किसान■*

*देवकर:-* कृषि संपन्न एवं कृषि प्रधान स्थानीय देवकर तहसील क्षेत्र के इलाकों में इन दिनों क्षेत्र के अन्नदाता किसान बन्धुओं द्वारा धान की पौधे तैयार करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। जिसके लिए बाकायदा खेतों में एक निश्चित पैमाने पर धान के नन्हे पौधों को उगाया दिया गया है। जिसे बड़े होने कर पश्चात खेतों में लगाकर पारंपरिक ढंग से खेती की जाएगी। वैसे तो किसानी क्षेत्र में धान बुवाई की यह प्रक्रिया उतना चलन में नही है, क्योंकि यह थोड़ा खर्चीला एवं मेहनत भरा होता है। जिसके फलस्वरूप पौधो से धान की जबरदस्त पैदावार पर असर होता है। इसलिए बड़े ज़मीदारी वर्ग के किसान खेतो में रोपाई कर धान की बुवाई करते है। जिसके कारण खेतों में गैरजरूरी खरपतवार नष्ट हो जाता है,जिससे धान के पौधे बेहतर ढ़ंग से विकसित होते है। फिलहाल इनदिनों देवकर तहसील इलाके के ज्यादातर गांवों में बारिश के सीजन के साथ रोपाई पद्धति से कृषि कार्य का आगाज हो गया है। इस सम्बंध में तहसील क्षेत्र के ग्राम बुन्देली के बुजुर्ग किसान गजराज सिंह ने बताया कि पूर्व की तुलना में वर्तमान समय पर कृषि के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है।जिससे अब खेतो में अनाज के रूप में धान के खेती के लिए अन्नदाताओं में रुचि बढ़ी है। जबकि पूर्व की तुलना में अब पैदावार एवं उपज बेहतर हो गयी है। जबकि इस सम्बंध में तहसील मुख्यालय देवकर कर किसान सुनील वर्मा ने बताता कि खेतो में से सिर्फ एक एकड़ में करीब 15 दिनों तक धान की पौधे तैयार करने से उसे दस से बीस एकड़ तक के दायरे में धान की पौधों की बुवाई हेतु तैयार किया जा सकता है। जिसमे लगभग 200 के मेहनताने के साथ किसानी मज़दूर लगाकर पौधों को पूरे खेतो में बुवाई कराई जाती है। जिसमे डीएपी युरिया की काफी खपत होती है एवं इस दौरान फसल में पानी की उपलब्धता पर भी विशेष ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है।



