*प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ ने सीएमएचओ बेमेतरा को तत्काल हटाकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की*

बेमेतरा:- प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ, छत्तीसगढ़ ने जिला बेमेतरा में पदस्थ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के विरुद्ध मुख्यमंत्री, कलेक्टर, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य, मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा संचालक स्वास्थ्य सेवाएं को विस्तृत शिकायत ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। संघ का कहना है कि जिला बेमेतरा में कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों सीएचओ को लंबे समय से मानसिक, आर्थिक एवं प्रशासनिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि सीएचओ संवर्ग के साथ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक व्यवहार किया जाता है, समीक्षा बैठकों में अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है, केवल सीएचओ को लक्ष्य बनाकर अन्य संवर्गों के कार्य भी कराए जाते हैं तथा एनएचएम द्वारा निर्धारित टर्म्स ऑफ रिफरेन्स के विपरीत कार्य लेने का लगातार दबाव बनाया जाता है।
संघ ने यह भी आरोप लगाया है कि महिला कर्मचारियों के साथ कथित रूप से ऐसा व्यवहार किया गया जिससे वे असहज महसूस करती हैं। इन शिकायतों की जांच कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकथाम, प्रतिषेध एवं प्रतितोष अधिनियम, 2013 पॉश एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप कराने की मांग की गई है।
*महिला कर्मचारियों के साथ कथित अनुचित एवं गरिमा-विरोधी व्यवहार*
संघ द्वारा प्रस्तुत शिकायत में आरोप लगाया गया है कि समीक्षा बैठकों एवं अन्य सामूहिक बैठकों के दौरान कुछ महिला सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ ऐसा व्यवहार किया गया जिससे वे स्वयं को असहज एवं अपमानित महसूस करती हैं। शिकायत के अनुसार, कथित रूप से महिला कर्मचारियों के कपड़े पकड़कर उन्हें अपनी ओर खींचने, लेज़र लाइट का उपयोग करते हुए उनके शरीर, विशेषकर वक्ष (स्तन) क्षेत्र की ओर संकेत करने तथा सार्वजनिक रूप से हँसी-मज़ाक करने जैसी घटनाएँ सामने आई हैं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सामूहिक बैठकों के दौरान एक महिला कर्मचारी से कथित रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तुम्हारा बॉयफ्रेंड है क्या? जैसी व्यक्तिगत एवं अपमानजनक टिप्पणी की गई। संघ का कहना है कि इस प्रकार की टिप्पणियाँ एवं व्यवहार महिला कर्मचारियों की गरिमा को ठेस पहुँचाते हैं, कार्यस्थल का वातावरण असुरक्षित बनाते हैं तथा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं।
संघ ने इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकथाम, प्रतिषेध एवं प्रतितोष अधिनियम, 2013 पॉश एक्ट तथा सर्वोच्च न्यायालय के Vishaka v. State of Rajasthan (1997) में प्रतिपादित सिद्धांतों के अनुरूप कराए जाने की मांग की है। साथ ही, यदि जांच में आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध लागू सेवा नियमों के अंतर्गत कठोर विभागीय एवं वैधानिक कार्यवाही किए जाने का अनुरोध किया गया है।
संघ के अनुसार जिन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में केवल एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी पदस्थ हैं, उन्हें प्रत्येक सप्ताह सेक्टर बैठक, फील्ड भ्रमण, हेल्थ मेला, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण अभियान तथा अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए स्वास्थ्य केंद्र बंद कर जाना पड़ता है। इससे अनेक उप-स्वास्थ्य केंद्र सप्ताह में कई दिनों तक बंद रहने की स्थिति उत्पन्न होती है और ग्रामीण मरीजों को समय पर ओपीडी, दवा वितरण एवं अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध नहीं हो पातीं।
संघ का यह भी कहना है कि जिला स्तरीय समीक्षा, डीएचएस बैठक एवं कलेक्टर समीक्षा बैठकों में एनएचएम के टीओआर के विपरीत अनेक कार्यों का उत्तरदायित्व केवल सीएचओ संवर्ग पर डाला जाता है, जबकि इन कार्यों का निष्पादन विभिन्न संवर्गों का सामूहिक दायित्व है। संघ ने आरोप लगाया है कि उच्च अधिकारियों के समक्ष सीएचओ संवर्ग की कार्यशैली के संबंध में नकारात्मक एवं भ्रामक प्रस्तुतीकरण किया जाता है, जिससे कर्मचारियों की पेशेवर छवि प्रभावित होती है।
प्रदेश संघ ने अपने ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 16 एवं 21, एचएम सीएचओ टीओआर, पॉश एक्ट, 2013 तथा सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। संघ ने मांग की है कि जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला बेमेतरा को जांच अवधि के दौरान तत्काल वर्तमान पद से हटाया जाए अथवा अन्यत्र पदस्थ किया जाए तथा जांच में आरोप सत्य पाए जाने पर संबंधित सेवा नियमों के अंतर्गत विभागीय कार्यवाही की जाए।
प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ ने शासन से सात दिवस के भीतर प्रभावी कार्रवाई प्रारंभ करने का आग्रह किया है। संघ ने कहा है कि यदि निर्धारित अवधि में कोई ठोस कार्रवाई प्रारंभ नहीं की जाती है, तो संघ अपने सदस्यों के हितों एवं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता की रक्षा के लिए विधिसम्मत एवं शांतिपूर्ण तरीके से चरणबद्ध आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।




