*●सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था का हाल-बेहाल, मकड़जाल-से फैले निजी ट्यूशन-कोचिंग के सहारे बच्चों की नैय्या पार●*

*बेमेतरा:-* ज़िला शिक्षा विभाग की लगातार निष्क्रियता एवं उदासीनता के कारण जिलेभर के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था भगवान भरोसे नज़र आ रहा है, देखा जाए तो दशकों पूर्व एक दौर में एजुकेशन के क्षेत्र में अग्रणी रहा बेमेतरा ज़िला में अब शिक्षा का हाल फिसड्डी है। आलम यह है कि शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत अधिकांश विद्यार्थी प्राइवेट ट्यूशन-कोचिंग के सहारे अपनी पढ़ाई पूरी कर पा रहे है। जिससे सरकारी सिस्टम की विश्वसनीयता भी दांव पर है।
दरअसल बेमेतरा ज़िला शिक्षा प्रशासन की निष्क्रियता व उदासीनता का परिणाम यह है कि आज हर सरकारी स्कूल में ज्यादातर स्कूली बच्चे निजी ट्यूशन व कोचिंग के बिना पढ़ाई नही कर पा रहे है जबकि उनको स्कूल में ही बेहतर पढाई की सुविधा दी जानी चाहिए। वही ज्यादातर इन स्कूली छात्र-छात्राओं में अनुशासनहीनता का भाव देखने को मिलता है, जिसमे स्कूल प्रशासक व प्रबन्धन की जवाबदेही बनती है, वही जिलेभर में ऐसे कई स्कूल है जहाँ गिनती के ही शिक्षक उपलब्ध है इसके कारण छात्रों की विभिन्न विषयों की पढ़ाई भी अधूरी रह जाने से प्रभावित होती है। जिसके कारण विद्यार्थियों को वैकल्पिक रूप से निजी कोचिंग-ट्यूशन का सहारा लेना पड़ता है। वही यह स्थिति सरकारी स्कूलों के पहली क्लास के बच्चे से लेकर 12वीं कक्षा तक हर एक विद्यार्थियों में अवधारणा बन रही है, कि बिना ट्यूशन-कोचिंग के बेहतर पढ़ाई कर पाना नामुमकिन है। बस इसी चिंता के कारण परिजन भी बच्चो को सरकारी स्कूल की पढ़ाई के साथ कोचिंग ट्यूशन भी करा रहे है, जो काफी चिंताजनक है। देखा जाए तो यह एक बिजनेस के रूप में उभर रहा है, जो सभी जगह स्कूली पढ़ाई व्यवस्था को चौपट कर जगह ले रहा है जो खतरनाक है। इस सम्बंध में जिला शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अफसरों को गम्भीरता से संज्ञान में लेकर स्कूली पढ़ाई व्यवस्था को दुरुस्त करानी चाहिए एवं सभी नगरीय व आँचलिक इलाको में संचालित बिना पंजीकृत एवं बिना पूरे मापदण्डों के ट्यूशन व कोचिंग सेंटरों पर कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए ताकि सरकारी एजुकेशन व्यवस्था को बेहतर किया जा सके।

*●नियम-मापदण्डों को ठेंगा दिखा रहे प्राइवेट ट्यूशन व कोचिंग सेंटर के संचालक●*
विदित हो कि बेमेतरा ज़िला के चारो विकासखण्डों में अवैधानिक रूप से सैकड़ो की तादाद में निजी ट्यूशन व कोचिंग सेंटरों की भरमार है, जो प्रशासन के नियम व कायदे-कानून को ताक पर रखकर बच्चों को पढ़ाई के नाम लूट रहे है। जिससे कही न कही हमारा शिक्षा व्यवस्था भी कमजोर साबित हो रहा है।शहरी इलाके से लेकर ग्रामीण अंचल के युवा पढ़ाई बेहतर करने के लिए इनका सहारा ले रहे है, जो उनको आर्थिक रूप से बच्चो के परिजनों को नुकसान पहुंचा रहा है।




