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*शासकीय भूमि पर कब्जा, किसानों का रास्ता बंद, बेमेतरा के परसबोड़ में उग्र आक्रोश, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल*

​बेमेतरा / साजा:- तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत परसबोड़ में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीणों और किसानों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। गांव के ही दबंग खेलावन यादव (पिता स्व. जेठू यादव) पर सार्वजनिक शासकीय भूमि को जबरन घेरकर किसानों का मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरकारी दस्तावेजों की अनदेखी और पंचायत के आदेशों को ठेंगा दिखाने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
*​तार घेरकर बनाया कोठार, खेतों तक पहुंचना हुआ दुश्वार*
तहसीलदार को दी गई शिकायत और सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, ग्राम परसबोड़ स्थित शासकीय नहरनाली भूमि (खसरा नंबर 1423, कुल रकबा 3.66 हेक्टेयर) के लगभग 0.01 हेक्टेयर (कचरी बॉट नाला क्षेत्र) पर आरोपी ने कटीले तारों की बाड़ लगाकर और कोठार बनाकर अवैध कब्जा कर लिया है। यह जमीन सरकारी अभिलेखों में दर्ज सार्वजनिक रास्ता है। इस रास्ते के बंद होने से दर्जनों किसानों का अपने खेतों तक जाना ठप हो गया है, जिससे एन फसल के सीजन में बोवाई और जोताई जैसे कृषि कार्य पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

*​पंचायत के 3-3 नोटिस दरकिनार, पटवारी रिपोर्ट में खुली पोल*

मामले में ग्राम पंचायत परसबोड़ की सख्त कार्रवाई के बावजूद कब्जाधारी के हौसले बुलंद है। ​ग्राम सभा का प्रस्ताव 05 जून 2026 को ग्राम सभा की बैठक में सर्वसम्मति से पारित कर अतिक्रमण हटाने का प्रस्ताव लाया गया था।

*नोटिस फाड़े/अस्वीकार किए*

पंचायत द्वारा आरोपी को एक-दो नहीं, बल्कि तीन-तीन बार नोटिस थमाए गए, लेकिन उसने नोटिस लेने से साफ इनकार कर दिया।
​पटवारी जांच में पुष्टि 27 जुलाई 2026 को पटवारी द्वारा किए गए मौके के निरीक्षण में ‘स्थल पंचनामा’ व ‘जांच प्रतिवेदन’ तैयार किया गया, जिसमें शासकीय रास्ते पर अवैध कब्जे और किसानों का मार्ग बाधित होने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है।

*​अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल, CM हेल्पलाइन तक पहुंचा मामला*

आक्रोशित ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत तहसीलदार न्यायालय (साजा) में मामला दर्ज कराने के साथ-साथ मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076) में भी शिकायत ठोक दी है।

*​अधिकारियों ने साधी चुप्पी*
इस पूरे गंभीर मामले पर शासन का पक्ष जानने के लिए जब तहसीलदार विनोद कुमार बंजारे एवं नायब तहसीलदार प्रदीप तिवारी से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो दोनों जिम्मेदार अधिकारियों ने फोन रिसीव करना तक मुनासिब नहीं समझा। अधिकारियों की इस अनदेखी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और क्षेत्र में प्रशासनिक मिलीभगत की चर्चाओं का बाजार गर्म है। ​पीड़ित किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द बुलडोजर चलाकर शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया और रास्ता बहाल नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन और तहसील कार्यालय के घेराव के लिए बाध्य होंगे।

GAUTAM BEMTRA

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