*बेरला तहसील कार्यालय की बदहाली, जमी काई और खराब वाटर कूलर से प्यास से तड़प रहे ग्रामीण, मूलभूत सुविधाओं पर उठे सवाल*

बेरला:- अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बेरला के अंतर्गत आने वाला तहसील कार्यालय इन दिनों व्यवस्थाओं की बदहाली को लेकर गहराते असंतोष का केंद्र बना हुआ है। प्रतिदिन विभिन्न शासकीय कार्यों के लिए दूर-दराज के गांवों से पहुंचने वाले सैकड़ों ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के अभाव में हलाकान हो रहे है। तहसील कार्यालय की उपेक्षा का आलम यह है कि सरकारी दावों और खर्चों के बावजूद जमीनी धरातल पर आम जनता को न्यूनतम सुविधाएं भी नसीब नहीं हो पा रही है।

तहसील कार्यालय परिसर और भवन की स्थिति को देखकर प्रशासनिक उदासीनता का साफ अंदाजा लगाया जा सकता है। बाहरी दीवारों पर सालों से काई जमी हुई है और रंग-रोगन न होने के कारण पूरी इमारत जर्जर नजर आती है। दीवारों के छज्जों पर घास और झाड़ियां उग आई हैं, जो यह साबित करने के लिए काफी हैं कि यहां लंबे समय से साफ-सफाई और रखरखाव का कोई काम नहीं हुआ है।
सब से अधिक परेशानी पेयजल व्यवस्था को लेकर हो रही है। भीषण गर्मी और धूप में काम कराने आने वाले लोगों के लिए कार्यालय परिसर में लगा वाटर कूलर महीनों से खराब पड़ा हुआ है। शुद्ध पेयजल की कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। मजबूरन ग्रामीणों को या तो बाहर से महंगे दामों में पानी खरीदना पड़ता है या प्यास दबाकर अपने काम पूरे होने का इंतजार करना पड़ता है।

लाखों रुपये के रखरखाव और विकास कोष के बावजूद तहसील कार्यालय की ऐसी दुर्दशा विभाग के आला अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। हर साल प्रशासनिक खर्च और साफ-सफाई के नाम पर जारी होने वाले बजट के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी अपने ही कार्यालय की सुध नहीं ले पा रहे हैं, तो वे आम जनता की समस्याओं का निराकरण कैसे करेंगे।

कार्यालय की इस दुर्दशा और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी जरूरत से वंचित ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द तहसील कार्यालय की मरम्मत कराने, साफ-सफाई सुनिश्चित करने और खराब पड़े वाटर कूलर को तुरंत ठीक कराकर पेयजल की समुचित व्यवस्था बनाने की मांग की है।



