*कुम्ही में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा किसान कुटीर सह कार्यालय सालों बाद भी निर्माण अधूरा, शौचालय निर्माण में घटिया सामग्री से टूट रही टाइल्स*

बेमेतरा:- विकासखंड बेरला के अंतर्गत ग्राम पंचायत कुम्ही में स्थित सेवा सहकारी समिति मर्यादित कुम्ही पंजी. क्र. 482 का किसान कुटीर सह कार्यालय भवन भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का एक जीता-जागता उदाहरण बन गया है। शासन द्वारा किसानों की सुविधा के लिए लाखों रुपये खर्च कर बनाए जा रहे इस भवन और परिसर की हालत आज दयनीय है। स्थानीय ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी, ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत के कारण यह पूरा प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है।

*उद्घाटन का समय और निर्माण का कार्य अब भी अधूरा*
किसान कुटीर सह कार्यालय की उद्घाटन दिनांक 7 दिसम्बर 2021 दिन मंगलवार को गरिमामयी उपस्थिति में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक आशीष छाबडा, जनपद पंचायत बेरला अध्यक्ष हीरा देवी वर्मा, रामेश्वर देवांगन ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बेरला, दाऊ रोशन वर्मा निगरानी समिति, पुष्पा टँकेश सभापति जिला पंचायत बेमेतरा सहित क्षेत्र की जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रहे। जिसके बाद भी ठेकेदार की लापरवाही व कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे है।

*प्रवेश द्वार पर लटक रही अधूरी सरिया*
भवन की मुख्य दीवार पर गर्व से लिखा है किसान कुटीर सह कार्यालय नवीन समिति स्थापना 17/10/2023, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। इस कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार का गेट पिछले कई सालों से अधूरा पड़ा हुआ है। मौके पर गेट के पिलर के लिए खड़े किए गए लोहे की सरियों के ढांचे जंग खा रहे है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि ठेकेदार ने पिलर खड़े करने के लिए गड्ढे तो खोदे और सरियां भी खड़ी कीं, लेकिन उसके बाद काम बंद कर दिया। अब ये सरियां सालों से इसी हालत में खड़ी हैं, जो न केवल ठेकेदार की लापरवाही को दर्शाती हैं, बल्कि आने-जाने वालों के लिए, विशेषकर रात के अंधेरे में, बड़े हादसे को न्योता दे रही हैं। यह अधूरा प्रवेश द्वार किसानों का स्वागत करने के बजाय, व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

*पुरुष-महिला प्रसाधन की हालत बदतर, निर्माण अब भी अधूरा*
भवन के पीछे की ओर शौचालय निर्माण कार्य का हाल तो और भी बुरा है। यहाँ दो शौचालय खंड बन रहे थे, जिनमें से एक पर पुरुष-महिला प्रसाधन का बोर्ड लगा है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि यह निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। पुरुष-महिला शौचालय के कमरे में न तो दरवाजा लगा है और न ही छत पूरी तरह सुरक्षित है। यह सिर्फ एक कंक्रीट का ढांचा मात्र बनकर रह गया है।

*घटिया सामग्री की पोल खोलतीं उखड़ती टाइल्स व मटेरियल*
ग्रामीणों की शिकायतों की पुष्टि तब होती है जब शौचालय के अंदरूनी हिस्से और सीढ़ियों को देखा जाता है। निर्माण में बेहद घटिया स्तर की सामग्री का उपयोग किया गया है। हालत यह है कि शौचालय अभी पूरी तरह चालू भी नहीं हुआ है और इसकी दीवारों व जमीन पर लगी काली और सफेद डिजाइन वाली टाइल्स सहित सीमेंट की मटेरियल उखड़ने लगी है।
सीढ़ियों और फर्श पर सीमेंट का मसाला कमजोर होने के कारण टाइल्स टूट कर बिखर गई है। मलबा चारों तरफ फैला हुआ है। शौचालय के अंदर पैन तो लगा दी गई है, लेकिन आसपास का फर्श अधूरा है और निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी है। फर्श पर पानी जमा होने और काई लगने से स्पष्ट है कि काम लंबे समय से बंद है और सामग्री खराब हो रही है।
*मिलीभगत और भ्रष्टाचार का आरोप*
इस बदहाली को लेकर स्थानीय लोगों और किसानों में भारी आक्रोश है। उनका सीधा आरोप है कि निर्माण एजेंसी, ठेकेदार और विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के बीच मिलीभगत है। किसानों का कहना है कि अधिकारियों ने बिना मौके का मुआयना किए और कार्य की गुणवत्ता जांचे ही ठेकेदार को भुगतान कर दिया है, जिसके चलते ठेकेदार ने घटिया काम किया और अब काम अधूरा छोड़कर गायब है। सरकारी पैसे की इस कदर बंदरबांट से किसान कुटीर का उद्देश्य ही विफल हो गया है।
*प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग*
कुम्ही और आसपास के इलाके के किसान अपने काम से अक्सर समिति कार्यालय आते है। शासन की मंशा उन्हें यहाँ सुविधा देने की थी, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और अधूरे निर्माण कार्य को गुणवत्तापूर्ण सामग्री के साथ जल्द से जल्द पूरा कराया जाए।



