विविध

*बरसात में विकास की अजीब ‘मजबूरी’, जब खेतों को छोड़ कीचड़ में गड्ढे खोदने लगे मजदूर*

बेमेतरा:- जिले के जनपद पंचायत बेरला क्षेत्र में इन दिनों शासन और प्रशासन का एक अजीबोगरीब रवैया देखने को मिल रहा है। चारों तरफ झमाझम बारिश हो रही है और किसान अपने-अपने खेतों में खरीफ फसल की बुवाई और रोपाई के कामों में पूरी ताकत से जुटे हुए हैं। लेकिन ठीक इसी ऐन मौके पर पंचायतों में ‘वीबी-जी राम-जी’ योजना के तहत धड़ाधड़ निर्माण कार्य शुरू करा दिए गए हैं। आलम यह है कि मजदूर घुटने भर पानी और कीचड़ के बीच गड्ढे खोदने को मजबूर हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

*किसानी के ऐन वक्त पर मजदूरों का संकट, किसान परेशान*

 

प्रदेश भर में यह सीजन पूरी तरह से खेती-किसानी को समर्पित रहता है। धान की रोपाई और बोआई के लिए समय सीमा बेहद मायने रखती है, क्योंकि जरा सी देरी पूरी फसल की उपज को प्रभावित कर सकती है। ऐसे संवेदनशील समय में पंचायतों में सरकारी काम चालू रहने के कारण गांवों में मजदूरों की भारी किल्लत पैदा हो गई है। किसानों को अपने ही खेतों में काम कराने के लिए मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे उनकी बुवाई का चक्र पूरी तरह बिगड़ रहा है और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का डर सताने लगा है।

 

*वाहवाही लूटने में मस्त प्रशासन, नियम-कायदे हवा में उड़ गए*

नियमों के मुताबिक, खरीफ बुवाई और रोपाई के मुख्य दिनों (जून-जुलाई) के दौरान जब ग्रामीण मजदूरों की खेतों में भारी मांग होती है, तब योजनाबद्ध सरकारी निर्माण कार्यों को अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है। इसका स्पष्ट मकसद किसानों को आसानी से श्रमिक उपलब्ध कराना होता है। इसी तरह नवंबर-दिसंबर में धान कटाई के वक्त भी इन कामों पर ब्रेक लगाया जाता है। लेकिन बेरला जनपद की कई ग्राम पंचायतों में इन प्रशासनिक गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाते हुए सिर्फ कागजी वाहवाही लूटने के लिए काम चलाए जा रहे हैं।

 

*कीचड़ में खोद रहे गड्ढे, काम की गुणवत्ता पर उठा सवाल*

भरी बरसात में मिट्टी पूरी तरह गीली और दलदली हो चुकी है। ऐसे में कीचड़ के बीच गड्ढे खोदना न केवल मजदूरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा है, बल्कि इस मौसम में किए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भी पूरी तरह राम भरोसे है। पानी से भरे गड्ढों में किया गया कोई भी स्थायी काम पहली ही तेज बारिश में बह जाने की कगार पर है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी जमीनी हकीकत से आंखें मूंदे बैठे हैं और मजदूरों को इस दुरूह स्थिति में काम पर लगाया जा रहा है।

*जिला प्रशासन की अनदेखी पड़ी भारी, किसानों का फूटा गुस्सा*

 

जिला प्रशासन की इस घोर लापरवाही और तालमेल की कमी के कारण स्थानीय किसानों में गहरा असंतोष पनप रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब मजदूरी का मुख्य जरिया खेती-किसानी है, तो सरकारी योजनाओं को कुछ समय के लिए स्थगित क्यों नहीं किया जा रहा? प्रशासन की इस हठधर्मिता के चलते किसानों के सामने अपनी गाढ़ी कमाई की फसल को समय पर तैयार करने का संकट खड़ा हो गया है। किसान अब सीधे तौर पर इस बेतुके फैसले का विरोध दर्ज करा रहे हैं।

*तत्काल काम रोकने और किसान हित में फैसले की मांग*

 

क्षेत्र के जागरूक ग्रामीणों और किसान संगठनों ने जिला प्रशासन से अविलंब हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी मांग है कि जब तक धान बुवाई और रोपाई का काम पूरी तरह सिमट नहीं जाता, तब तक पंचायतों में चल रहे इन गैर-जरूरी गड्ढे खुदाई के कामों पर तुरंत रोक लगाई जाए। यदि समय रहते प्रशासन ने अपनी नीति में बदलाव नहीं किया, तो आने वाले दिनों में कृषि संकट और गहरा सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जनपद और जिला प्रशासन के अधिकारियों की होगी।

GAUTAM BEMTRA

Related Articles

Back to top button