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*मनियारी स्कूल में 80 हजार की राशि का फर्जीवाड़ा, आरईएस विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत पर उठे गंभीर सवाल*

 

​बेमेतरा:- विकासखण्ड बेरला क्षेत्र अंतर्गत आने वाले शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मनियारी में स्कूल मरम्मत के नाम पर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) उप संभाग विभाग बेरला और ठेकेदार के गठजोड़ द्वारा भारी वित्तीय अनियमितता और घटिया निर्माण का मामला उजागर हुआ है। नौनिहालों की सुरक्षा को ताक पर रखकर शासन द्वारा स्वीकृत लगभग 80,000 रुपये की प्रशासकीय राशि को ठिकाने लगाने का खेल खेला जा रहा है। स्कूल की जर्जर दीवारें, अंदर उखड़ता प्लास्टर, छत की सीलिंग और छज्जों की गहरी दरारें इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि मरम्मत के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी कर बजट डकारने की तैयारी है।

*​गणित का खुलासा 28 हजार का काम, 51 हजार पांच सौ का सीधा गबन*

जनसेवक रविन्द्र भास्कर चौबे और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत वास्तविक आकलन ने विभाग के दावों की पोल खोल दी है। स्कूल में केवल दो ट्रैक्टर रेत 10,000 रु., 25 बोरी सीमेंट 7,500 रु., मजदूरी 10,000 रु. और बरामदे की मामूली चूना-पोताई 1,000 रु. का कार्य कराया गया है, जिसकी कुल लागत मात्र 28,500 रुपये बैठती है। ऐसे में यह सवाल प्रशासनिक तंत्र पर बड़ा प्रहार करता है कि जब धरातल पर काम केवल 28 हजार पांच सौ रुपये का हुआ, तो स्वीकृत राशि का शेष 51 हजार पांच सौ रुपये किस मद में और किसकी अनुमति से ठिकाने लगाया जा रहा है?

*​पारदर्शिता का जनाजा, सूचना बोर्ड पर जालसाजी और भ्रम फैलाने की कोशिश*

भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए सूचना बोर्ड पर अंकित जानकारियों के साथ खुल्लेआम छेड़छाड़ और कांट-छांट की गई है। बोर्ड पर स्वीकृत राशि 75,000 से 80,000 रु. और तिथियों को मिटाकर अस्पष्ट कर दिया गया है। बोर्ड पर कार्य प्रारंभ तिथि 7 जुलाई 2026 तथा पूर्णता तिथि 1 अगस्त 2026 अंकित है, जबकि स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त बीत जाने के बाद भी काम अधूरा पड़ा है। यह स्पष्ट करता है कि ठेकेदार और विभागीय अधिकारी कागजी खानापूर्ति कर ग्रामीणों व शासन को भ्रमित कर रहे हैं।

*​जिम्मेदार अधिकारी की बेपरवाही, बिना निरीक्षण और मूल्यांकन के चल रहा खेल*

पूरे मामले में आरईएस उप संभाग बेरला के सब-इंजीनियर राहुल भगत का गैर-जिम्मेदाराना बयान विभागीय लापरवाही को उजागर करता है। दूरभाषा पर संपर्क करने पर अधिकारी ने स्वीकार किया कि उन्हें इस मामले की जानकारी ग्रामीणों से मिल रही है और उन्होंने कार्यस्थल का दोबारा निरीक्षण ही नहीं किया है। बिना किसी तकनीकी निरीक्षण और मूल्यांकन के निर्माण कार्य की ऐसी अनदेखी यह साबित करती है कि नीचे से ऊपर तक मॉनिटरिंग सिस्टम पूरी तरह ठप पड़ा है, जिससे ठेकेदार के हौसले बुलंद हैं।

*​कलेक्टर व उच्चाधिकारियों से तकनीकी जांच और कड़े एक्शन की मांग*

मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों और जनसेवक रविन्द्र भास्कर चौबे ने जिला दंडाधिकारी कलेक्टर व वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि एक विशेष तकनीकी टीम गठित कर कार्य की गुणवत्ता, सामग्री की मात्रा और सूचना बोर्ड की जालसाजी की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में अनियमितता पाई जाती है, तो दोषी सब-इंजीनियर पर दंडात्मक कार्यवाही और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करते हुए रिकवरी के आदेश जारी किए जाएं, ताकि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों में खौफ कायम हो सके।

GAUTAM BEMTRA

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