*केटीयू के चार शोधार्थियों का पीएचडी प्री-सबमिशन सेमिनार संपन्न*

*विशेषज्ञों ने शोध की गुणवत्ता, मौलिकता एवं सामाजिक उपयोगिता पर दिए महत्वपूर्ण सुझाव*
रायपुर:- कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के जनसंचार शोध केंद्र द्वारा पीएचडी शोधार्थियों का प्री-सबमिशन सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में चार शोधार्थियों ने अपने-अपने शोध कार्यों का प्रस्तुतिकरण किया। इस दौरान विषय विशेषज्ञों एवं डीआरसी सदस्यों ने शोध कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए उन्हें और अधिक प्रामाणिक, प्रभावी एवं समाजोपयोगी बनाने के लिए आवश्यक सुझाव प्रदान किए।
सेमिनार में शोधार्थी दीक्षा देशपांडे ने बच्चों द्वारा स्मार्ट फोन पर देखी जाने वाली विषयवस्तु से उनके व्यवहार में आने वाले परिवर्तनों का समीक्षात्मक अध्ययन, विनोद सावंत ने भारतीय राजमार्गों पर चलित माध्यमों से होने वाले दृश्य-संचार के विविध आयामों का समीक्षात्मक अध्ययन, विकास कुमार ने जनजातीय समुदायों में लोकसंचार परंपराओं का अध्ययन (छत्तीसगढ़ की उरांव जनजाति के विशेष संदर्भ में) तथा सैयद आमिर मुस्तफा हाशमी ने ए कम्पेरेटिव स्टडी ऑन बेटरमेंट ऑफ सोसायटी थ्रू कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी कम्युनिकेशन छत्तीसगढ़ एंड झारखंड विषय पर अपने शोध कार्य का प्रस्तुतीकरण किया।
कार्यक्रम में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर की मानव विज्ञान अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. अशोक प्रधान विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने शोधार्थियों के शोध कार्यों का मूल्यांकन करते हुए शोध पद्धति, संदर्भ सामग्री, शोध की मौलिकता, विश्लेषण की गुणवत्ता तथा सामाजिक उपयोगिता के विभिन्न आयामों पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध केवल शैक्षणिक उपलब्धि तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज, नीति-निर्माण तथा ज्ञान-विस्तार में भी सार्थक योगदान देने वाला होना चाहिए। इस अवसर पर विभागीय शोध समिति (डीआरसी) के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र मोहंती, सदस्य डॉ. आशुतोष मंडावी एवं डॉ. नृपेन्द्र शर्मा कुमार ने भी शोधार्थियों के प्रस्तुत शोध कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्हें आवश्यक सुधार एवं परिष्कार संबंधी सुझाव दिए। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष पंकज नयन पांडे तथा जनसंपर्क विभाग के डॉ. शैलेन्द्र खण्डेलवाल ने भी शोधार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए उनके शोध कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में अपने विचार साझा किए। विश्वविद्यालय के अतिथि शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राओं ने भी उपस्थित रहे। इस दौरान शोधार्थियों से उनके शोध कार्यों से संबंधित प्रश्न पूछे।




