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*चंदखुरी में होगा तीन दिवसीय ऐतिहासिक मानस महासम्मेलन: “मानस ब्रह्म गर्भ मंथन 6.0” में जुटेंगे देश-विदेश के संत*

चंदखुरी (रायपुर): भगवान श्रीराम की ननिहाल और छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रमुख केंद्र माँ कौशल्या धाम, चंदखुरी आगामी 26 से 28 सितंबर 2026 तक एक भव्य और ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। यहाँ तीन दिवसीय ‘मानस महासम्मेलन’ एवं “मानस ब्रह्म गर्भ मंथन 6.0” का आयोजन किया जाएगा, जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के संत, मानस मर्मज्ञ और विद्वान सम्मिलित होंगे।

​आयोजन की भव्य तैयारी

​माँ कौशल्या मंदिर समिति के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस महासम्मेलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। मानस दर्शन जीवन अर्पण के संस्थापक दीपक गुहा के नेतृत्व में केंद्रीय टीम ने आयोजन स्थल का दौरा किया। मंदिर ट्रस्ट और समिति के पदाधिकारियों के बीच करीब पाँच घंटे तक चली इस बैठक में संतों के आगमन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

​गरिमामय संचालन और समन्वय

​बैठक का संचालन राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक और अंतरराष्ट्रीय कलमकार  मुन्नालाल देवदास ने किया। उनके कुशल मार्गदर्शन में आयोजन की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया। इस दौरान आयोजन को सफल और प्रेरणादायी बनाने के लिए विभिन्न समितियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया।

​आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनेगा चंदखुरी

​आयोजकों ने बताया कि इस तीन दिवसीय आयोजन में:

  • ​छत्तीसगढ़ की विशिष्ट मानस मंडलियों द्वारा मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी।
  • ​देश-विदेश से पधारे विद्वानों और संतों के प्रवचनों से पूरा धाम आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर होगा।
  • ​सनातन संस्कृति और श्रीरामचरितमानस के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा।

​प्रमुख पदाधिकारी और जन-सहभागिता

​बैठक में मानस दर्शन जीवन अर्पण केंद्रीय समिति से देवलाल लाल सिन्हा, आत्मराम साहू, विष्णु साहू सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे। साथ ही, चंदखुरी नगर पंचायत अध्यक्ष प्रदीप बैस, मुख्य पुजारी गणेश राम, माँ कौशल्या मंदिर समिति के अध्यक्ष रामस्वरूप वर्मा, मानस संघ रायपुर के अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर समेत बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, पार्षद और महिला मंडली ने आयोजन को लेकर उत्साह व्यक्त किया।

​आयोजकों का मानना है कि यह आयोजन न केवल छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय जोड़ेगा, बल्कि श्रीरामचरितमानस की सीख को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

GAUTAM BEMTRA

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