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*लू लगने से हीट स्ट्रोक के कारण बचाव और आयुर्वेदिक उपचार* 

 

बेरला:- इन दिनों नौतपा चल रहा है, गर्मी कहर बनकर लोगों पर टूट रही है। प्रदेश में इन दिनो भीषण गर्मी की मार से हर कोई परेशान है।जिले में भी तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इस बीच मौसम विभाग ने आने वाले तीन दिनों के लिए सभी जगहों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। इससे स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में भी ग्रीष्म लहर हीट वेव की स्थिति बनी रहेगी। 30 मई तक भीषण गर्मी के साथ रात में भी गर्म हवाएं चलेंगी। ऐसे में लू लगने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। इस संबंध में आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी टकसींवा डॉ कुश कुमार साहू ने बताया कि लू लगने (हीट स्ट्रोक) के कारण बचाव और आयुर्वेदिक उपचार के बारे में इन दिनों दोपहर के समय बाहर बहुत तेज गर्म हवाएं चलती हैं इन गर्म हवाओं को ही लू या हिट स्ट्रोक कहते हैं। मजबूत इम्युनिटी वाले लोग इन गर्म हवाओं को सहन कर लेते हैं लेकिन अधिकांश लोग इन हवाओं को सहन नहीं कर पाते हैं और इनके संपर्क में आते ही बीमार पड़ जाते हैं। अपने देश में हर साल काफी बड़ी तादात में लोग लू की चपेट में आ जाते हैं।

*लू लगने के कारण*

ये गर्म हवाएं जब आपके शरीर के संपर्क में आती हैं तो शरीर का तापमान बढ़ा देती हैं और इस वजह से कई समस्याएं होने लगती हैं। ज्यादा देर तक धूप में काम करना और शरीर में पानी की कमी होना लू लगने के प्रमुख कारण हैं। बच्चे और बूढ़े लोग लू की चपेट (सनस्ट्रोक) में जल्दी आ जाते हैं। अधिकांश मामलों में लोगों को यह जल्दी पता ही नहीं चल पाता है कि उन्हें लू लग गयी है। हालांकि इसका सटीक अंदाज़ा लू के लक्षणों को देखकर लगाया जा सकता है। इसलिए हर किसी को लू के लक्षणों की पूरी जानकारी होनी चाहिए।

*लू लगने के लक्षण :*

लू लगने पर सिर में तेज दर्द होना, चक्कर आना और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं होने लगती हैं। शुरुआत में इन लक्षणों की तीव्रता काफी कम होती है लेकिन समय के साथ-साथ ये बढ़ते जाते हैं। लू लगने पर अचानक से तेज बुखार होने लगता है और शरीर में गर्मी बढ़ती जाती है। शरीर में गर्मी बढ़ने के बावजूद भी लू लगने के दौरान शरीर से पसीना नहीं निकलता है।

लू लगने पर उल्टी आना और शरीर में तेज दर्द होना आम बात है। उल्टी होने के कारण शरीर में सोडियम और पोटैशियम का संतुलन बिगड़ जाता है। कमजोर इम्युनिटी वाले या शारीरिक रुप से कमजोर लोग लू लगने से बेहोश भी हो जाते हैं।

*लू लगने पर क्या करें*

लू लगने पर मरीज को तुरंत छायादार जगह पर या ठंडी जगह पर लिटायें। शरीर को ठंडा रखने के लिए शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां लगाएं। घर के खिड़की दरवाजे खोल दें और कूलर या एसी चालू कर दें। अगर मरीज लू लगने से बेहोश हो गया है तो तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएं।

*लू से बचने के उपाय :*

यह सच है कि हर साल लू से कई लोगों की जान चली जाती है लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि अगर गर्मी के मौसम में आप ठीक ढंग से अपना ख्याल रखें और कुछ ज़रुरी सावधानियां बरतें तो लू के प्रकोप से बच सकते हैं। आइये लू से बचने के कुछ प्रमुख उपायों के बारे में जानते हैं। गर्मियों के दिनों में हल्का भोजन करें, पूरी बांह के कपड़े पहनें और नंगे पैर बाहर ना निकलें। हल्के रंगों वाले सूती कपड़े पहनें, सिंथेटिक कपड़ों से परहेज करें। गर्मी के दिनों में कभी भी खाली पेट घर से बाहर ना निकलें, ज्यादा देर तक धूप में रहना हो तो छाते का इस्तेमाल करें। अधिक मात्रा में पानी पिएं। बाहर जाते समय पानी की बोतल साथ लेकर जाएं।

 

*लू से बचने के घरेलू उपाय*

लू लगने के अधिकतर मामलों में आप कुछ घरेलू उपाय अपनाकर ही इसे ठीक कर सकते हैं। इसके लिए अपनी डाइट में ठंडे तरल पेय पदार्थों का सेवन अधिक करें। आइये कुछ प्रमुख घरेलू उपायों के बारे में जानते हैं।

-घर पर ही आम का पना बनाकर पियें। लू से बचने का यह सबसे असरदार घरेलू उपाय है। प्याज को भून लें और इसे एक साधारण प्याज के साथ मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण में जीरा पाउडर और मिश्री मिलाकर खाने से भी लू से आराम मिलता है। इसके अलावा रोजाना खाने में कच्चे प्याज का इस्तेमाल करें। धनिये और पुदीने दोनों की ही तासीर ठंडी होती है। लू से बचने के लिए गर्मियों में रोजाना धनिये और पुदीने का जूस बनाकर पिएं। सब्जियों का सूप बनाकर रोजाना सेवन करें। शरीर को ठंडा रखने के लिए दिन में एक या दो बार नींबू पानी का सेवन ज़रुर करें।

 

*लू से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपाय :*

आयुर्वेद के अनुसार गर्मियों के दिनों में ठंडी तासीर वाली चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए। ठंडी तासीर वाली चीजों को खाने से शरीर में ठंडक बनी रहती है और लू नहीं लगती है। हम आपको कुछ ऐसे घरेलू आयुर्वेदिक उपाय बता रहे हैं जिनका लू लगने पर इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है। सेब का सिरका लू लगने पर शरीर में मिनरल और इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो जाती है खासतौर पर पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे ज़रुरी मिनरल की मात्रा काफी कम हो जाती है। ऐसे में सेब के सिरके का सेवन करने से ये खोए हुए मिनरल वापस मिल जाते हैं और शरीर में इनका संतुलन बना रहता है। चंदनासव यह चंदन और कई तरह की जड़ी बूटियों से निर्मित एक आयुर्वेदिक पेय औषधि (आसव) है। आयुर्वेद के अनुसार चंदनासव में शीतल गुण होता है। ठंडी तासीर होने के कारण जब शरीर में गर्मी या जलन काफी बढ़ जाती है तो इसका इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद रहता है। लू लगने पर इसका सेवन करने से जल्दी आराम मिलता है। बेल का शरबत गर्मियों में बेल का शरबत अमृत के समान होता है। बेल में विटामिन सी और फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसके सेवन से शरीर में ठंडक बनी रहती है और लू से बचाव होता है। बेल का शरबत पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखता है। गिलोय का जूस गिलोय में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करती है। आयुर्वेद के अनुसार गिलोय वात, पित्त और कफ शामक माना जाता है। यह लू में होने वाले तेज बुखार को जल्दी ठीक करती है और शरीर के तापमान को और बढ़ने से रोकती है। उशीरासव उशीरासव (खस) एक आयुर्वेदिक पेय औषधि है। यह पित्तशामक है और लू लगने पर यह शरीर में होने वाली गर्मी और जलन को शांत करने में मदद करती है। इसके अलावा पित्त संबंधी सभी रोगों में आप उशीरासव का इस्तेमाल कर सकते हैं।

इन उपायों को आयुर्वेद चिकित्सक के परामर्श अनुसार अपनाकर आप आराम पा सकते हैं लेकिन बेहतर यही होगा कि गर्मियों के मौसम में आप लू से बचने के सभी तरीके अपनाएं। बेवजह बाहर धूप में ना निकलें और अगर बाहर निकलना ज़रुरी है तो धूप से बचाव के लिए छाते का प्रयोग ज़रुर करें। अगर घरेलू या आयुर्वेदिक उपायों से कोई आराम नहीं मिल रहा है तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर अपना इलाज करवाएं या जिला आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी बेमेतरा डॉ वीणा मिश्रा के निर्देशन में जिले में 27 आयुर्वेद औषधालय संचालित है जहां उचित परामर्श लिया जा सकता है।

GAUTAM BEMTRA

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