*परम्परा बनाये रखना हमारा कर्तव्य-जितेन्द्र साहू*

छत्तीसगढ़ में मानसू आने के बाद सभी किसान धान बुवाई के तैयारी में तेजी से लगे हुऐ है इसी कड़ी में में युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र साहू ने भी धान बुवाई की शुरुआत पारंपरिक हल बैल से जोत कर धान बोवाई कर प्रारंभ किया जितेंद्र साहू ने कहा कि आज के युग में उन्नत आधुनिक खेती के साथ-साथ हमें अपनी परंपरा संस्कृति को भी ध्यान में रखते हुए कार्य करना है हम वह पीढ़ी है जो परंपरागत संस्कृति को बचाकर आने वाला भविष्य के लिए रख सकते हैं।
पहले छत्तीसगढ़ में पारंपरिक खेती विशेषकर 1970-80 के दशक में मवेशी की संख्या अधिक हुआ करती थी पारंपरिक खेती का प्रचलन भी चरम पर था परंतु अब पशुओं खासकर बैल की संख्या में भारी गिरावट आई है इसे पारंपरिक खेती करने में किसानों को भारी परेशानी हो रही है खेती किसानी में तकनीक का प्रयोग बड़ा गया है फिर भी हमे इसे संजोक रखने का एक प्रयास करें छत्तीसगढ़ कि परम्परा में हल बैल का विशेष योगदान रहा इसे हमें नहीं भुलना चाहिये। गाँव में आज भी छोटे किसान कम खेती करने वाले किसान बैल से खेती करते हुए पारंपरिक प्रचलन को कायम रखे हुए हैं।




