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*शहर, नगर एवं गाँव की परिभाषा से अनजान पीडब्ल्यूडी विभाग के अफसर, अजब-गजब कार्यशैली से जनता में भ्रामकता तो प्रशासन की जमकर फजीहत*

 

*■बेमेतरा/बेरला:-* लोक निर्माण विभाग के साजा सब डिवीजन क्षेत्र अंतर्गत नगर मुख्यालय बेरला में इन विभाग की लापरवाही का अजब-गजब नमूना देखने को मिल रहा है। जिससे प्रशासनिक कार्यशैली की जमकर फजीहत हो रही है।

दरअसल विकासखण्ड मुख्यालय स्थित नगर बेरला को शासन-प्रशासन द्वारा दशकों से नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त है। वही इसी बीच धमधा क्षेत्र से बेरला नगर आगमन पर सड़क किनारे स्थित सूचक पट्टिका में पीडब्ल्यूडी विभाग के जिम्मेदार आला-अफसर इस बेरला नगर को गाँव लिखकर पूरा परिभाषा ही बदल दिए है जिससे आसपास के क्षेत्रवासी भी हैरान है। यही नही बेरला क्षेत्र में दूसरी ओर की सूचक बोर्ड बकायदा इसे शहरी क्षेत्र का दर्जा दे दिया है, जिससे बेरला सहित परिक्षेत्र के आमजनमानस में भ्रामकता की स्थिति है। जबकि नियमतः देखा जुए तो बेरला न तो ग्रामीण और न शहरीय रीजन के बजाय एक नगरीय क्षेत्र का टाउन है। जहाँ पर विकासखण्ड, जनपद, तहसील एवं नगर मुख्यालय होने के कारण दर्जनों शासकीय कार्यालय भी है। इसके बावजूद बेरला को पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा दोयम दर्जे से परिभाषित कर आम लोगों में असमंजस फैलने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा बोर्ड को नही बदला जा रहा है। जबकि बेरला स्थित विश्राम गृह में रोजाना एक जिम्मेदार सब इंजीनियर की उपस्थिति दिनभर रहती है। नगर सहित अंचल के रहवासियों का कहना है कि बेरला नगर को कही शहर तो कही गाँव बताना यह छोटी लेकिन अहम प्रशासनिक चूक है, जो शहर व गाँव एवं नगर में फर्क नही कर पाने से एक तरह से शासन-प्रशासन की अज्ञानता को जगजाहिर करता है। वही अन्य लोगों ने बताया कि नगर, गाँव व शहर के लिए अपना अपना अलग जनसंख्या को लेकर मापदण्ड है जिसके आधार पर ही कस्बे को नगर, गाँव अथवा शहर का दर्जा प्रदान किया जाता है। परन्तु प्रशासन द्वारा एक नगर को ऐसे दो अलग अलग मापदण्ड से परिभाषित करने विभाग की कार्यस्वरूप एवं शैली और सवाल खड़ा होता है। इस सम्बंध में जिला एवं विकासखण्ड प्रशासन को गम्भीरता से लेकर ध्यान देते हुए तत्काल बोर्ड हटवाकर बदलवानी चाहिए, ताकि आम नागरिकों को असुविधा, असमंजस एवं भ्रम की स्थिति न हो।

GAUTAM BEMTRA

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