*मनियारी में बंदरों के बढ़ते आतंक व उत्पाद से ग्रामीण परेशान, दो लोगो को काटने से बना भय का माहौल*

*(बंदरों के बीस-बीस झुंड होने पर ग्रामीण असुरक्षित)*
बेरला:- उप वन विभाग साजा व जनपद पंचायत बेरला के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मनियारी में बंदरों के आतंक व उत्पाद से ग्रामीण परेशान व दो लोगों को काटने से ग्राम में अफरा तफरी के साथ भय का माहौल बना है। बंदरों के इस उत्पाद के कारण लोग अपने घरों तक के सुरक्षित नहीं है। ग्राम मनियारी में एक महिला व लड़के को बंदर के काटने से गांव के लोग परेशान हो गया है। जिससे ग्रामीण अपने घर के बाहर निकलने को कतराने लगे है। बड़े तो बहुत दूर की बात है छोटे-छोटे बच्चों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। यहां तक कि ये स्कूल जाने व गांव में कई दैनिक काम, खेत, स्नान, दुकाने, पानी तथा तरह तरह कार्यों के लिए घर के बाहर निकलना पड़ता है। एक तरफ बंदरों के उत्पाद व आतंक के कारण घर से निकलना समस्या बन गया है। कस्बे मेें बंदरों के बढ़ते आतंक से स्थानीय लोग परेशान हैं। आए दिन बंदरों के हमले से कोई न कोई घायल हो जाता है। बंदरों के झुंड के सामने से गुजरना खतरे से खाली नहीं होता। गांव की गली-गली, घर के छप्पर, छत व पदों में इधर उधर उछलकूद करते रहते है। बंदरों के बड़े-बड़े झुंड हैं। पैदल चलने वाले कई लोग इनके झुंड को देखकर अपना रास्ता बदल लेते हैं। स्थानीय लोगों ने कहा कि कस्बे में बंदरों का आंतक इतना फैल गया है कि गांव के लोग काफी परेशान हो चुके हैं। बंदरों की वजह से हर रोज बॉडी में लगे सब्जियों को नुकसान कर दिया गया है। बंदर इतने चालाक हैं कि घर के अंदर घुसकर रखा सामान ले जाते हैं। लोगों ने यह भी कहा कि कस्बे के कुछ स्थान ऐसे हैं जहां से गुजरना हो तो हाथ में डंडा लेना पड़ता है नहीं तो बंदर हमला कर देते हैं। बंदरों के डर से लोग बच्चों को छतों पर अकेला नहीं भेजते और स्कूल भी खुद छोड़ने जाते हैं।
इस संबंध में ग्राम वासी रविन्द्र भास्कर चौबे ने बताया कि ग्राम मनियारी में महिला व लड़के को बंदर के काटने से गांव में भय का माहौल बना गया है। इस पर वन विभाग को ध्यान देने की बहुत जरूरी है। अन्यथा एक दो दिनों में किसी को बंदर के काटने की घटना बढ़ते जाएंगे। बंदरों के आतंक पर काबू पाने के लिए विशेष ध्यान दिया जाए ताकि मनियारी में इनके आतंक पर काबू पाया जा सके।




