*करोड़ों की लागत से बना झालम का पहला ‘गौ अभ्यारण्य’ तीन साल में ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा, शेडों में आई दरारें*

बेमेतरा:- बेमेतरा-नवागढ़ मार्ग पर स्थित ग्राम झालम में 72 एकड़ भूमि पर 6 करोड़ 57 लाख रुपये की लागत से छत्तीसगढ़ का पहला गौधाम अभ्यारण्य निर्मित किया गया है। राष्ट्रीय गोकुल योजना और शासन की मंशा के तहत वर्ष 2015 से प्रस्तावित इस ड्रीम प्रोजेक्ट को 9 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद तैयार किया गया था। लेकिन लोकार्पण से पहले ही इस बहुचर्चित गौधाम अभ्यारण्य में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और घटिया निर्माण की पोल खुलकर सामने आ गई है।

छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड दुर्ग संभाग के अंतर्गत बना यह गौधाम महज 3 वर्षों के भीतर ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। गौधाम परिसर में निर्मित 12 शेड, कार्यालय भवन और अन्य बुनियादी ढांचों के निर्माण में जमकर मनमानी की गई है। जमीनी स्तर पर भवनों की स्थिति यह बयां कर रही है कि संबंधित ठेकेदार और विभागीय इंजीनियरों द्वारा निर्माण कार्य में किस कदर लापरवाही बरती गई है।

नवनिर्मित शेडों, कार्यालय भवनों और चबूतरों की दीवारों पर आई चौड़ी व गहरी दरारें गुणवत्ताहीन निर्माण की गवाही दे रही हैं। कंक्रीट और प्लास्टर जगह-जगह से फट चुके हैं, जिससे किसी भी वक्त बड़ी दुर्घटना होने का अंदेशा बना हुआ है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के हाथों इस गौ धाम अभ्यारण्य के भव्य लोकार्पण की तैयारियां चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर घटिया निर्माण के चलते इसकी मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो गए है।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जिला प्रशासन और मंडी बोर्ड के अधिकारियों की अनदेखी के चलते ठेकेदार ने घटिया सामग्री का उपयोग कर जनता के करोड़ों रुपये बर्बाद कर दिए। पूर्व में गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदर दास, स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किए जाने के बावजूद इस जर्जर होते निर्माण पर ध्यान न देना बड़े प्रशासनिक भ्रष्टाचार और मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
मामले में जनसेवक रवींद्र भास्कर चौबे ने तंज कसते हुए कहा कि शासन-प्रशासन की कथित मिलीभगत के कारण ही इस जर्जर निर्माण पर पर्दा डाला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो संबंधित विभागीय अधिकारियों की पोल खुल जाएगी, इसी भय से सभी जिम्मेदार मौन साधे हुए हैं और जनता की गाढ़ी कमाई से बनी संरचना को बदहाली की कगार पर छोड़ दिया गया है।
वहीं जब इस गंभीर समस्या को लेकर मंडी बोर्ड के सब इंजीनियर परवेज बेग को तस्वीरों के साथ अवगत कराया गया, तो उन्होंने संतोषजनक जवाब देने के बजाय उल्टा रुख अपनाया। इसके अलावा मामले पर पक्ष जानने के लिए दूरभाषा के माध्यम से संपर्क करने पर सहायक यंत्री अजय प्रताप सिंह और कार्यपालन यंत्री के.के. कंवर ने कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया और चुप्पी साध ली।
एक तरफ जहां भौतिक निर्माण जर्जर हालत में पहुंच चुका है, वहीं दूसरी तरफ पूर्व जिला प्रशासन और कलेक्टर रणबीर शर्मा द्वारा इसके जल्द से जल्द हस्तांतरण और मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर ताबड़तोड़ बैठकें की जा रही थी। अगस्त 2024-25 महीने में प्रस्तावित दौरे को लेकर परिसर में हेलीपैड निर्माण और अन्य व्यवस्थाओं को तो दुरुस्त किया जा रहा है, लेकिन जर्जर शेडों की मरम्मत व जांच पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा घोषित नई ‘गौधाम योजना’ के तहत इन परिसरों को वैज्ञानिक पद्धति से निराश्रित व तस्करी से छुड़ाए गए मवेशियों के संरक्षण, चारागाह विकास, और गौ-आधारित उद्योगों के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में संचालित करने की योजना है। इस योजना के तहत चरवाहों को 10,916 रुपये तथा गौसेवकों को 13,126 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने का प्रावधान है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
झालम गौ अभयारण्य में 200 दुधारू गायों, 144 सामान्य और 344 अन्य मवेशियों (कुल क्षमता) के रखरखाव का लक्ष्य रखा गया था। इसके साथ ही कौशली नस्ल की गायों के संरक्षण और संवर्धन की योजना भी बनाई गई थी। वर्तमान में पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. राजेंद्र भगत के अनुसार यहाँ 180 मवेशी रखे गए हैं और डॉक्टरों की टीम तैनात है, लेकिन गुणवत्ताहीन शेडों के कारण मवेशियों की सुरक्षा पर ही संकट मंडरा रहा है।
क्षेत्र के स्थानीय नागरिकों और ग्रामीणों ने शासन व उच्च अधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि लोकार्पण से पहले इस करोड़ों रुपये के गौधाम निर्माण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि घटिया सामग्री का इस्तेमाल करने वाले ठेकेदारों और मौन साधे जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि शासकीय धन के दुरुपयोग पर लगाम लग सके।
शो पीस बन कर रह गया झालम के गौधाम अभ्यारण्य जहां आवारा मवेशियों को रखा जाना चाहिए वही दूसरी ओर सड़कों में घूम रहे है जिसके कारण जिले में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं सड़क पर हो रही है। जिसमें मवेशी की जान तो जा रही है साथ ही मनुष्य की भी जाने जा रहे है। इसकी व्यवस्था सही तरीके से नहीं लचर होते जा रहे है महत्वकांक्षी योजना।



