*दुर्ग-बेमेतरा राजमार्ग पर पशुओं का बसेरा, जनप्रतिनिधियों की लापरवाही से बड़ी दुर्घटना की संभावना*

बेमेतरा/बेरला:- जिला बेमेतरा से दुर्ग को जोड़ने वाले व्यस्त राजमार्ग पर इन दिनों मवेशियों का जमावड़ा वाहन चालकों के लिए काल बनता जा रहा है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अमले की लापरवाही के चलते सड़क पर दिन-रात दर्जनों की संख्या में गाय, भैंस और अन्य पशु बैठे-बिखरे नजर आ रहे हैं, जिससे कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इस राजमार्ग पर सुबह से लेकर रात तक ग्राम कंटेली, डुंडा, हथमुड़ी, भेड़नी, देवरबीजा, केशडबरी, कोदवा, बुडेरा चौंक, राखी-जोबा सहित कई जगहों पर सड़क किनारे और बीच सड़क पर मवेशी बैठे रहते हैं। अंधेरे और तेज रफ्तार वाहनों के बीच राहगीर कई बार बाल-बाल बचते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या पिछले कई महीनों से बनी हुई है, लेकिन इसे लेकर न तो प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया है और न ही जनप्रतिनिधियों ने गंभीरता दिखाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार सिर्फ कागजों पर वाहवाही लूट रहे हैं, धरातल पर स्थिति शून्य है।
*पूर्व आईपीएस ने चलाया था अभियान*
उल्लेखनीय है कि जब जिले में पूर्व आईपीएस रामकृष्ण साहू पदस्थ थे, तब उन्होंने सड़क पर बैठे मवेशियों को रात-रात भर घूमकर किनारे व्यवस्थित करवाया था। उन्होंने गांव-गांव में रोका-छेका अभियान चलाने के निर्देश भी दिए थे। लेकिन उनके जाने के बाद फिर से वही स्थिति बन गई है।
*रात में बढ़ जाता है खतरा*
रात के समय सड़क पर स्ट्रीट लाइट की कमी और अचानक सड़क पर आ जाने वाले मवेशियों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ गई है। दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मवेशियों को खुला छोड़ने वाले पशुपालकों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही। रोका-छेका होने के बाद भी कई मवेशी खुले में घूमकर किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
*लोगों में आक्रोश, मांग*
बेरला क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार पंचायत और जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक न तो मवेशियों के लिए सुरक्षित चारागाह/कांजीहाउस बनाया गया और न ही सड़क पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए। स्थानीय नागरिक रविन्द्र भास्कर चौबे ने कहा कि “जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के चलते राहगीरों की मुसीबत बढ़ गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल मवेशियों को सड़क से हटाकर बाड़े की व्यवस्था की जाए, दुर्घटना संभावित स्थानों पर रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। राजमार्ग पर रोजाना सैकड़ों भारी वाहन और यात्री बसें गुजरती हैं। समय रहते कार्रवाई न होने पर बड़ी जनहानि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।




