खेत की तैयारी से लेकर, बुवाई तक, लहसुन की खेती में रखें इन जरूरी बातों का ख्याल, बंपर होगी पैदावार
सुल्तानपुर: खरीफ की फसल धान, तिल और उड़द तैयार हो चुकी है, जिनकी कटाई के बाद किसान अब रबी की फसल के लिए अपने खेत तैयार कर रहे हैं. इस दौरान लहसुन की खेती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. अगर आप भी लहसुन की खेती करने का विचार कर रहे हैं तो कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. सही तैयारी और वैज्ञानिक विधि अपनाने से ही लहसुन की अच्छी पैदावार सुनिश्चित की जा सकती है. यहां जानिए खेती के लिए जरूरी टिप्स.लहसुन की खेती के लिए सबसे उपयुक्त भूमि वह होती है जिसमें जीवांश की मात्रा पर्याप्त हो. उच्च पैदावार के लिए जीवांशयुक्त दोमट मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है. इसके अलावा जल निकासी की उचित व्यवस्था वाला खेत ही लहसुन के लिए अनुकूल माना जाता है. बुवाई से पहले खेत की 4 से 5 बार गहरी जुताई करना और मिट्टी को भुरभुरा बनाना जरूरी है. इसके साथ ही अंतिम जुताई से तीन सप्ताह पहले कम्पोस्ट या सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाना फायदेमंद रहता है.
कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर के मुख्य कृषि वैज्ञानिक डॉ. जे.बी. सिंह ने बताया कि लहसुन अपने औषधीय गुणों के लिए मशहूर है और इसकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए बीजों के बीच सही दूरी रखना जरूरी है. पंक्ति से पंक्ति और पौधे से पौधे की दूरी 10-10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. इस तरह से लहसुन के पौधे बेहतर तरीके सेउच्च पैदावार वाले बीजों की प्रजाति
लहसुन की उच्च पैदावार वाली प्रजातियों में जमुना सफेद 1, जमुना सफेद 2, जमुना सफेद 3, एग्रीफाउंड सफेद और एग्रीफाउंड पार्वती शामिल हैं. लहसुन की बुवाई के समय इन प्रजातियों के बीजों का प्रयोग करना चाहिए. प्रति हेक्टेयर 6 से 7 कुंतल बीज पर्याप्त माना जाता है. लहसुन बोने के 8 से 10 दिन बाद पहली सिंचाई करनी चाहिए ताकि पौधों को पर्याप्त नमी मिल सके और तेजी से विकास हो. विकसित होते हैं और पैदावार अधिक होती है.




