*●शिक्षक सेमिनार के आयोजन में 21 टीचर व 2 सीएससी सहित अन्य ने अलग-अलग आर्ट पर दी शानदार प्रस्तुति●*

*देवकर:-* विगत दिनों शिक्षक-शिक्षिका सम्बंधित टीचर सेमिनार का आयोजन हुआ। जिसमे सहसपुर संकुल के 21 शिक्षक साथी एवं 02 सीएससी एमडी साहू(सहसपुर) व जितेंद्र कुंजाम(देऊरगाँव) ने भाग लिया। जिनमे से 06 शिक्षकों ने प्रस्तुतिकरण किया। इस सेमिनार में चार शिक्षिकाओ में भावना अग्रवाल, वर्षा शेख, ज्योति दुबे सभी प्राथमिक शाला नवकेशा तथा शिक्षिका नीतू देवांगन प्राथमिक शाला सहसपुर संकुल सहसपुर ने कहानी फेस्ट की कहानियों को अलग अलग तरीकों से बच्चों को सुनाया गया, जिसमे कहानी को पोस्टर / कहानी पुस्तक/ बोर्ड पर चित्र बनाकर सुनाया गया।जबकि दूसरा कहानी को फिंगर पपेट के माध्यम से सुनाया गया, तीसरा कहानी को मुखौटा के माध्यम सुनाया गया और चौथा कहानी को रोल प्ले के माध्यम से बच्चों को सुनाया गया, इसके अंतर्गत कहानी सुनाना, कहानी पर बातचीत करना, कहानी से संबंधित मौखिक और लिखित सवाल पर कार्य करना, कहानी से संबंधित चित्र बनाना | इसे विधाओ से बच्चों को कहानी सुनने में अधिक रुचि उत्पन्न हुई | वही दीवार पत्रिका – शिक्षिका (ममता गायकवाड़ प्राथमिक शाला अकलवार) ने दीवार पत्रिका पर कार्य किया है। जिसमे शिक्षिका द्वारा बच्चों को उनकी कक्षा स्तर के अनुसार पहले बच्चों को कक्षा में रखी वस्तुओ जैसे– ब्लैकबोर्ड, पेन, कॉपी, पुस्तक आदि पर दो से लेकर पाच वाक्यों को स्वयं में लिखने का प्रयास कराया, जब बच्चे अगली कक्षाओ में इसमे दक्ष हो गए तब उन्हे शाला तथा शाला से बाहर गाँव में घटने वाली घटनाओ, योजनाओ एवं त्योहारों का आकलन कर मौलिक लेखन कराया जिसमे वे स्थानीय भाषा के साथ-साथ स्कूल की भाषा अर्थात हिन्दी और इंग्लिश में भी लेखन एवं चित्रकारी किए | साप्ताहिक पत्रिका में सप्ताह में होने वाले आयोजन जैसे त्योहार, जन्मदिन और उस पर चित्रकारी तथा मासिक पत्रिका में कहानियाँ, कविताएँ , मनाए गए विभिन्न दिवस पर चित्र और नारे, पहेलियाँ आदि लगाया जाता है तथा उन्मे से त्रुटियाँ रहित और आकर्षक कार्यों को चुनकर उन्हे वार्षिक दीवार पत्रिका पर लगाया जाता है | इसे बनाने के उद्देश्य, प्रक्रिया, इससे बच्चों में प्रभाव को शिक्षिका द्वारा साझा किया गया। शिक्षक – डोगेन्द्र कुंजाम ने कक्षा 3 से 5 में हिन्दी पठन और लेखन पर अपने कार्य को साझा किया जिसमे बच्चों को पढ़ने एवं लिखने का अवसर देना। इसके लिए बच्चों को पाठ व स्टोरी फेस्ट- पुस्तकालय से पढ़ी कहानी व अन्य कहानी सुनाते है , उसे बिना देखे स्वयं से लिखने के लिए कहते है। इसके अतिरिक्त, गाँव, स्कूल, मित्र आदि पर स्वयं से लेखन का अवसर दिया जाता है। कुछ बच्चे पॉइंट और कुछ पेराग्राफ में लिखते है। लेखन में अधिकांश छत्तीसगढ़ी के शब्द होते है , प्रारंभ में उन्हे वेसे ही लिखने दिया जाता है, वही बाद में मात्रा, शब्द-संरचना, हिन्दी के शब्द जोड़ने हेतु कार्य किया जाता है। इस तरह की गतिविधि अधिकांशतः सप्ताह में एक बर करने का प्रयास किया जाता है |
इसके अतिरिक्त बच्चों के कार्य के नमूने (sample) भी साझा किया गया |
सभी प्रस्तुकर्ता शिक्षिकों ने इससे प्राप्त आउट्कम भी साझा किए।
इस सेमिनार में संकुल प्राथमिक शाला सहसपुर से नीतू देवांगन, प्राथमिक शाला नवकेशा से भावना अग्रवाल, वर्षा शेख, ज्योति दुबे ने कहानी फेस्ट की कहानियों को अलग-अलग विधाओं से बच्चों को सुनाया। जिसमे पोस्टर, चित्र, बोर्ड पर नीतू देवांगन, मुखौटा पर भावना अग्रवाल, रोल प्ले पर वर्षा शेख, फिंगर पपेट पर ज्योति दुबे, दीवार पत्रिका पर ममता गायकवाड़ एवं लेखन कौशल पर डोंगेन्द्र कुंजाम विशिष्ट रहे।




