*21वीं सदी की अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा के लिए तैयार है बेमेतरा के शिक्षक।*

बेमेतरा:- विकास खंड स्तरीय एफएलएन प्रशिक्षण में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम कन्या बेमेतरा में शिक्षकों का एफएलएन प्रशिक्षण में उत्साह का माहौल रहा। जिसमें शिक्षकों से वन टू वन बातचीत किया गया कि कैसे हम 21वीं सदी की शिक्षा के लिए बच्चों को तैयार कर सकते हैं। जहां लगातार बात हो रहा है कि शाला में पढ़ाने वाले बच्चों को भाषाई दक्षता और गणितीय संक्रिया में दक्ष करें। प्रशिक्षण के दौरान स्कर्ट से पवन कुमार देवांगन ने सीखना को कैसे सीखते हैं इस पर बातचीत आरंभ करने से पहले ऐसा माहौल तैयार किया कि हर शिक्षक के मन में आगे क्या बातचीत होगा उत्सुकता सब के चेहरों पर साफ झलक रहा था। देवांगन ने कहा की वास्तव में हम शिक्षक के रुप में मेहनत बहुत करते हैं। लेकिन हमारी ऊर्जा की खपत वहां हो रहा है जहां से परिणाम अपेक्षा के अनुसार नहीं आ रहा। अगर 21वीं सदी के लिए बच्चों को तैयार करना है तो क्रिटिकल, थिंकिंग, क्रिएटिविटी, कलैबरेशन, कॉम्युनिकेशन, कंपैशन, कॉन्फिडेंस आदि इन छः पर काम करने की जरूरत है। हमें बच्चों की प्रतिभा पर विश्वास करने की जरूरत है। बच्चों में सीखने की अपार संभावनाएं होती है। इन संभावनाओं को खोजने की जरूरत है।
आगे चर्चा परिचर्चा में बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित करना। स्वंय से सीखने के लिए चुनौती देना। सीखने के लिए विषय मित्र पियर लर्निंग ग्रुप लर्निंग गलीमित्र का सहयोग लेना। बच्चों की जिज्ञासू रवैया का सम्मान करना। सीखने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग अधिक से अधिक सीखने के लिए प्रेरित करने में सेल्फि विथ सक्सेस का उपयोग करना। स्वंय की समीक्षात्मक अध्ययन के डायरी लेखन पर जोर दिया गया। इसके माध्यम से हम अपनी सफलता को अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक उद्धरण प्रस्तुत कर सकते हैं। अपनी कठिनाई को दुसरे सफल शिक्षक से सीख कर दूर कर सकते हैं।
शिक्षकों की जिज्ञासा को और बढ़ाते हुए कैसे हम एक दूसरे से सीख सकते हैं पर शिक्षकों को चुनौती दिया गया। प्रशिक्षण हाल में उपस्थिति सभी शिक्षकों ने सीखने के नए तरीकों को समझने के लिए तैयार थे कक्ष का माहौल 5 मिनट के लिए ऐसा लग रहा था कि कोई बोर्ड की परीक्षा चल रहा हो सब अपने अपने चुनौती पर कार्य कर रहे थे। जिसने अपने चुनौती पूर्ण किया और जिसने नहीं किया सभी को एक स्तर पर कैसे ला सकते हैं। इस पर विषय मित्र की कांसेप्ट पर कार्य किया गया। शिक्षकों को विषय मित्र की भूमिका में बाकी को सीखाने की चुनौती दिया गया। डीआरजी प्रीतम चंद्राकर ने अपने अनुभव रखते हुए बताया की ऐसा लग रहा था की शिक्षक किसी को सीखाने में इतना उत्साह पहली बार देखें है। जब कोई बात हमें पता नहीं होता तो बहुत कठिन लगता है और अगर उस पर अपनी समझ बनाने ले तो उस पर हमारी पुर्वाग्रह टूट जाता है। डीआरजी इमरान खान ने बताया की अगर हम अपनी ऊर्जा का सही उपयोग करते हैं तो बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान को आसानी से हासिल कर सकते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में जो ढांचागत बदलाव किया गया है 5+3+3+4 अत्यंत महत्वपूर्ण परिवर्तन के लिए प्रेरित करता है। सीखने के लिए प्रथम पांच वर्ष में तीन वर्ष बालवाड़ी में बच्चे सीखेंगे और जब स्कूल रेडिनेश पर कार्य करते हैं तो सफलता निश्चित रूप से प्राप्त कर सकते हैं। गणित शिक्षण पर धनिराम बंजारे द्वारा ईएलपीएस के सिद्धांत पर रोचक गतिविधि कराया गया। जिसमें बच्चों की अनुभव उस अनुभव पर उनकी भाषा उनके भाषा को चित्रों के रुप में प्रदर्शित करना और फिर वर्ण या अंक के रुप में समझ बनाना।
प्रशिक्षण में विशेष सहयोग अजिम प्रेमजी फाउंडेशन राघवेन्द्र ने अभ्यास पुस्तिका पाठ्य-पुस्तक और शिक्षक संदर्शिका को कैसे एलाइनमेंट करते हुए सीखने को सरल बना सके हैं। प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए डीएमसी ने बताया की बच्चों की कठिनाई को समझना होगा। और उसे दूर करने के लिए हमें योजना बनाने की आवश्यकता पर अपनी बात रखते हुए सभी को आगामी शिक्षा सत्र के लिए शुभकामनाएं दिए।




