भक्तों ने मनाया अवतरण दिवस को ‘विश्व सेवा-सत्संग दिवस’ के रूप में*

*भक्तों ने मनाया अवतरण दिवस को ‘विश्व सेवा-सत्संग दिवस’ के रूप में*
श्री योग वेदांत सेवा समिति, कवर्धा द्वारा भोरमदेव आश्रम में पूज्य संत श्री आशारामजी बापू का अवतरण दिवस अर्थात् ‘विश्व सेवा-सत्संग दिवस’ पर विभिन्न निःस्वार्थ सेवाकार्यों को करते हुए हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
शहर में एक विशाल संकीर्तन यात्रा का आयोजन हुआ जिसमें सांस्कृतिक झाँकियों के साथ-साथ समिति एवं आश्रम द्वारा संचालित सेवाकार्य, संत-महापुरुषों की महिमा, देशभक्ति दर्शाते बैनर और गरीबों की सेवा के संदेश को लेकर सैकड़ों की संख्या में लोगों ने भाग लिया। भीड़ देख के लगा कि बापूजी के जेल में होने के बावजूद उनके शिष्यों की श्रद्धा में थोड़ी भी कमी नहीं आयी है। संकीर्तन यात्रा शौर्य भवन ठाकुरपारा से शुरू होकर शहर के प्रमुख चौराहों से होते हुए शौर्य भवन में पहुँचकर सम्पन्न हुई। जगह-जगह संकीर्तन यात्रा का पुष्प-हारों से स्वागत किया गया।
इसके अलावा आज भोरमदेव आश्रम में भी यह कार्यक्रम बड़े धूमधाम से मनाया गया। छपरी में स्थित आश्रम के आसपास के गरीब आदिवासी परिवारों मे भंडारा व जीवनोपयोगी सामग्रियों का वितरण भी किया गया।
आज शाम 5:00 बजे वृद्ध आश्रम में फल एवं जीवन उपयोगी सामग्रियों का भी वितरण किया जाएगा।
विश्व सेवा सत्संग दिवस निमित्त सहसपुर लोहारा, कुंडा, पांडातराई, पंडरिया, पोंड़ी, कवर्धा में विगत 1 सप्ताह से अलग-अलग तिथियों में निःशुल्क शीतल पलाश शरबत, एवं प्रसादी का वितरण किया गया।
स्थानीय श्री योग वेदांत सेवा के मीडिया प्रभारी ने बताया कि आज विश्व के सामने खड़ी अनेक समस्याओं का समाधान समाज की निःस्वार्थ भाव से सेवा करने से ही सम्भव है। इसका उद्घोष एवं सफल भगीरथ प्रयास किया है – लोकसंत श्री आशारामजी बापू ने। उनका यह प्रयास आज विश्वव्यापी अभियान का रूप ले चुका है । पूज्य बापूजी से प्रेरणा पाकर उनके करोड़ो शिष्य अपने सद्गुरुदेव के अवतरण-दिवस को ‘विश्व सेवा-सत्संग’ दिवस के रूप में पिछले अनेक वर्षों से मनाते आ रहे हैं। गत वर्षों की तरह इस अवतरण दिवस पर भी पूज्य बापूजी के शिष्यों द्वारा वर्षभर चलनेवाले 27 मुख्य एवं अन्य कई सेवा अभियानों का नवीनीकरण भी होता है। संत श्री आशारामजी बापू का कहना है कि कर्म करने की कला जान लो और उसे कर्मयोग बनाओ तो कर्म आपको भगवान से मिलानेवाले हो जायेंगे | आप ‘बहुजनहिताय, बहुजनसुखाय’ कार्य करके स्वयं परमात्मा में विश्रांति पा लो । बाहर से सुख पाने की वासना मिटाओ और सुखस्वरूप में विश्रांति पाते जाओ।’ इन्हीं वचनों का आदर करते हुए पूज्यश्री के शिष्यों द्वारा विभिन्न समाजोत्थान के कार्य किये जाते हैं। गरीबों, अनाथों, अभावग्रस्त आदिवासियों में अन्न, वस्त्र आदि जीवनोपयोगी वस्तुएँ तथा आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है तथा बच्चों को सत्साहित्य, नोटबुकें आदि का वितरण किया जाता है।
कोमल कुमार मीडिया प्रभारी,
श्री योग वेदांत सेवा समिति
फोन नं : 6264254128
ई-मेल : komalnirmalom@gmail.com



