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*बोरिया में शासकीय जमीन और वृक्षों पर कथित अवैध कब्जे की उठी मांग, लोक निर्माण विभाग और तहसील प्रशासन की निष्पक्ष जांच की मांग*

 

बेरला:- लोक निर्माण विभाग बेमेतरा और तहसील बेरला क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बोरिया में कथित रूप से शासकीय भूमि एवं वृक्षों पर अवैध कब्जा किए जाने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय बेरला के अधीन ग्राम बोरिया में दो अलग-अलग स्थानों पर शासकीय जमीन को घेरने की शिकायतें सामने आ रही है।

*सड़क किनारे शासकीय वृक्ष और जमीन घेरने का आरोप*

 

स्थानीय लोगों और जनसेवक रवींद्र भास्कर चौबे के अनुसार, बेरला से अहिवारा मार्ग पर स्थित ग्राम बोरिया में सड़क के किनारे लगे शासकीय वृक्षों और सरकारी भूमि पर एक अज्ञात भू-स्वामी द्वारा अवैध कब्जा किया जा रहा है। आरोप है कि पहले लगाए गए सीमेंट पोल को धीरे-धीरे 2 से 3 फीट आगे बढ़ाकर फेंसिंग बाउंड्रीवॉल का निर्माण कर लिया गया है, जिससे शासकीय पेड़ व जमीन कब्जे में आ गए हैं।

 

*वीएनआर सीड्स प्राइवेट लिमिटेड की कार्यशैली पर उठे सवाल*

दूसरी ओर ग्राम पंचायत बोरिया में संचालित निजी कंपनी ‘वीएनआर सीड्स प्राइवेट लिमिटेड पर भी शासकीय भूमि पर अतिक्रमण करने के आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों और जनसेवक चौबे का कहना है कि कंपनी द्वारा पूर्व में अपने परिसर की सीमा पर पोल व जालीदार तार से घेराबंदी की गई थी।

*नाली खोदकर बाउंड्रीवॉल निर्माण से असंतोष*

 

आरोप है कि निजी कंपनी ने अपनी पुरानी बाउंड्री लाइन को आगे बढ़ाते हुए सड़क किनारे बनी नाली की जगह पर गड्ढे खोदकर नई बाउंड्रीवॉल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। सड़क किनारे नाली और शासकीय जमीन को दबाकर पक्की दीवार खड़ी किए जाने से स्थानीय निवासियों में भारी असंतोष और नाराजगी व्याप्त हो रही है।

 

*जनसेवक रवींद्र भास्कर चौबे की निष्पक्ष जांच की अपील*

 

मामले को लेकर जनसेवक रवींद्र भास्कर चौबे ने कहा कि लोक निर्माण विभाग और राजस्व विभाग को मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि बेमेतरा लोक निर्माण विभाग तथा बेरला तहसील प्रशासन द्वारा मौके का निष्पक्ष सीमांकन कराकर अवैध कब्जाधारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

 

*ग्रामीणों की मांग—दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई*

 

क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय संपत्ति, सड़क किनारे के वृक्ष और नालियां सार्वजनिक हित के लिए हैं। किसी भी निजी व्यक्ति या निजी कंपनी को सरकारी जमीन दबाने का अधिकार नहीं है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में आवागमन और जल निकासी की गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है।

 

*सरपंच से संपर्क करने का प्रयास रहा असफल*

 

इस पूरे मामले पर ग्राम पंचायत बोरिया के सरपंच बीरेंद्र कुमार टंडन का पक्ष जानने के लिए जब दूरभाषा (फ़ोन) के माध्यम से संपर्क साधने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, जिसके कारण उनका आधिकारिक बयान प्राप्त नहीं हो सका।

 

*प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार*

 

फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय नागरिक और जनप्रतिनिधि अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि राजस्व विभाग और लोक निर्माण विभाग की टीम कब मौके पर पहुंचकर जांच की कार्रवाई शुरू करती है।

GAUTAM BEMTRA

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