विविध

*■देवरबीजा में अस्पताल के बाहर खुले में मेडीकल वेस्ट का कचरा, संक्रमण का बढ़ा खतरा■*

*■■बेमेतरा:-* ज़िला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर देवरबीजा के शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में इन दिनों स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन की बड़ी लापरवाही का नज़ारा देखने को मिल रहा है। इस आयुष्मान आरोग्य केंद्र के बाहर चन्द कदमों की दूरी पर अस्पताल के जैविक चिकित्सा अपशिष्ट (बायो मेडिकल वेस्ट) के कूड़े-कचरे का काफी बड़ा ढेर लगा हुआ है, जो पर्यावरण सहित आमजनो की स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। वही अस्पताल प्रबंधन एवं जिम्मेदार स्वास्थ्य अमला के द्वारा खुलेआम पड़े जहरीले कचरे पर न कोई एक्शन लिया जा रहा है और न ही क्रियाकलाप में पाबंदी लगाई जा रही है जिससे दिनों दिन बढ़ता हुआ जैविक चिकित्सा अपशिष्ट से संक्रमण फैलने की सम्भावना बढ़ गयी है।

 

 

गौरतलब हो कि शासन-प्रशासन द्वारा मेडिकल व स्वास्थ्य सम्बन्धित सेवा कार्य से सम्बद्ध निजी व शासकीय संस्थानों को सफाई व स्वच्छता को लेकर सख्त गाइडलाइन व दिशानिर्देश जारी है। लेकिन उसी के कागजी आदेशो की अवहेलना करते हुए देवरबीजा सहित जिले के अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं में खुलेआम संक्रमण को दावत देकर आमजनो की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। बताया जाता है कि अस्पतालों व अन्य चिकित्सकीय गतिविधियों के दौरान निकले कचरे को खुले स्थान पर फेंकने पर सख्त प्रतिबन्धित है।वही संक्रमण व बीमारियों की आशंका को देखते हुये इंसीनरेटर के माध्यम से नष्ट व निस्तारण की जवाबदारी संस्था प्रबन्धन एवं बायो वेस्ट एजेंसी पर होती है। वही इस दरम्यान एक बड़ी लापरवाही देखी जा रही है कि ज़िले के अधिकांश नगरीय व अन्य इलाकों में जैव चिकित्सकीय कचरे को लापरवाहीपूर्वक नगरीय निकाय की संचालित डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन में सामान्य कचरो के साथ खुला फेंक दिया जाता है जिसमे बड़ी लापरवाही स्थानीय प्रशासन की है, इसका उचित बन्दोबस्त हेतु स्वास्थ्य विभाग को जागरूकता अभियान भी चलाया जाना चाहिये।

 

*●बायो मेडिकल वेस्ट व पर्यावरण संरक्षण का प्रमाण पत्र आवश्यक●*

जानकारी के मुताबिक बेमेतरा ज़िले में फिलहाल सैकड़ो की तादाद में शासकीय एवं निजी चिकित्सालय व दर्जनभर से ज्यादा पैथोलॉजी लैब व अन्य बड़ी संख्या में क्लिनिक व नर्सिग होम्स संचालित है। जिसमे शासन के निर्देशानुसार निजी अस्पताल, नर्सिंग होम्स व लैब को बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण एवं छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल का प्रमाण पत्र रखना अनिवार्य है।जिसके बाद ही चिकित्सकीय कार्य की अनुमति स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जाती है। किंतु जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही व मिलीभगत से बिना प्रमाण पत्रों के भी निजी रूप से चिकित्सकीय कार्य किये जा रहे है, जो बड़ा गम्भीर है।

 

*●सिलतरा की ट्रीटमेंट एजेंसी दे रही ज़िले में निरन्तर सेवा●*

फिलहाल बेमेतरा ज़िले में बायो मेडिकल अपशिष्ट के निपटारे व प्रबन्धन के लिए बकायदा शासन द्वारा अनुबंधित रायपुर शहर के सिलतरा स्थित मेसर्स वाटरग्रेस एनवायरोप्रोटेक्ट प्राइवेट लिमिटेड की एजेंसी के जवाबदेही में ट्रीटमेंट फैसिलिटी सेवा दी जा रही है।जिसमे हर दो दिनों में बेमेतरा ज़िले से बायो मेडिकल कचरे को एकत्रित कर वैज्ञानिक तरीके इसका निस्तारण किया जाता है।

 

*■गम्भीर बीमारियों के संक्रमण की आशंका■*

चूंकि ज्ञात हो कि बायो मेडिकल कचरा स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए काफी हानिकारक है, अतः इसका उचित निपटारा जरूरी है। ऐसे कचरे से ना केवल जमीन की मिट्टी, जल और वायु प्रदूषित होते है बल्कि महामारी, विभिन्न प्रकार के संक्रमण एचआईव्ही, हिपेटाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा रहता है।

 

 

*■मेडिकल वेस्ट के नियम■*

दरअसल जिलेभर के सभी शासकीय एवं निजी हॉस्पिटल व पैथोलॉजी लैब से निकलने वाले जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबन्धन नियम 2016 का पालन करना अनिवार्य है।जिसके तहत इन सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम्स, और क्लिनिक से निकलने वाले बायो वेस्ट जैसे मानवीय व पशु उत्तक अंग, पट्टी-प्लास्टर, रक्त की थैलियाँ, सीरिंज-सुई व ब्लेड, रसायनिक अपशिष्ट, दवाइयों की शीशियां, कांच के डिब्बे इत्यादि का उचित निबटारा करना नियमतः जरूरी है।

 

*●वेस्ट को डिस्पोज न करने पर कड़ा प्रावधान●*

फिलहाल इन बायो मेडिकल वेस्ट को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। जिसमे खराब रक्त, मानव अंग जैसी चीजों को लाल डिब्बे में रखा जाता है।वही रुई, इंजेक्शन और बेकार दवाइयों को पीले डिब्बे में रखा जाता है।जबकि बाकी बची हुई चीजों को हरे डिब्बे में रख दिया जाता है। फिर इन सभी बॉक्स को किसी के संपर्क व पहुंच से दूर ऐसी जगह ले एकत्रित करके मेडिकल वेस्ट एजेंसी के वाहनों का इंतजार किया जाता है जिसके पश्चात इन सभी चिकित्सकीय कचरे को अस्पताल में मेडिकल वेस्ट के डिस्पोजल का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी के कर्मचारी गाडिय़ों में सुरक्षित तरीके से भरकर प्लांट ले जाया जाता हैं।फिर वहां नियमानुसार इंसीनेेटर के माध्यम से नष्ट कर दिया जाता है।यदि ऐसे उचित क्रियान्वयन कर अपशिष्टों का निस्तारण न करने पर अस्पतालों, लैबों, नर्सिंग होम्स, क्लीनिकों के विरुद्ध कठोर दण्डात्मक कार्यवाही के रूप में पांच साल की सजा व पांच लाख रूप्यव तक के जुर्माने का प्रावधान है।

GAUTAM BEMTRA

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