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गाय, चारा, दवा, इलाज सब सरकार का, दूध-गोबर आपका, ये स्कीम किसानों के लिए वरदान

कौशांबी. प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब गौशालाओं में रह रहे गौवंश को इच्छुक व्यक्तियों को नि:शुल्क दिया जा रहा है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य गौवंश संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना है. योजना के अंतर्गत जो व्यक्ति या परिवार गौवंश पालन करना चाहता है, उसे गौशाला से मुफ्त में गाय या बैल दिया जाता है. इतना ही नहीं, सरकार की ओर से उस गौवंश के भरण-पोषण के लिए 50 रुपये प्रतिदिन प्रति गौवंश की आर्थिक सहायता भी दी जाती है, ताकि चारे और राशन की व्यवस्था आसानी से हो सके. इस योजना का मुख्य उद्देश्य केवल आवारा गौवंश की समस्या का समाधान करना ही नहीं है, बल्कि पशुपालन को रोजगार का साधन बनाकर गांवों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना भी है.

बीमार पड़ जाए तब क्या करें

योजना के अंतर्गत चयनित लाभार्थी को गौशाला से चार गौवंश मुफ्त में दिए जाते हैं. सरकार की ओर से उस गौवंश के भरण-पोषण के लिए 50 रुपये प्रतिदिन की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है. यह राशि सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जाती है, ताकि चारे, भूसे और अन्य जरूरी खर्च आसानी से पूरे किए जा सकें. गोवंश को अगर कोई बीमारी होती है तो उसका भी इलाज मुफ्त में किया जाता है. इसके लिए संबंधित अधिकारी और डॉक्टरों को सूचना देना होगा. मात्र ₹5 के फॉर्म भरे जाते हैं. उसी के आधार पर गोवंश का इलाज मुफ्त में किया जाता है. इसके लिए एक एंबुलेंस भी निर्धारित की गई है ताकि डॉक्टर मौके पर पहुंचकर उसका सही तरीके से इलाज कर सकें. सरकार ने कर्मचारी भी नियुक्त किए हैं.गौवंश पालन से लाभार्थी को कई तरह के फायदे होते हैं. गाय से मिलने वाला दूध परिवार के पोषण में सहायक होता है. अतिरिक्त दूध बेचकर आमदनी भी की जा सकती है. गोबर से जैविक खाद तैयार कर खेती में उपयोग किया जा सकता है, जिससे रासायनिक खाद पर होने वाला खर्च कम होता है. गोबर गैस प्लांट के जरिए गैस और बिजली उत्पादन का रास्ता भी खुलता है. इस योजना से गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. किसानों की आय बढ़ेगी और गौवंश को सुरक्षित वातावरण मिलेगा. खासकर छोटे और सीमांत किसानों, बेरोजगार युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है.कौशांबी के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि एक व्यक्ति को एक आधार कार्ड पर चार गोवंश दिए जा सकते हैं. व्यक्ति को एक फॉर्म भरना होता है. उसके साथ आधार कार्ड, निवास और बैंक खाता चाहिए. गोवंश को देने के बाद पशु चिकित्सा अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी समय-समय पर उसकी देखरेख के लिए पहुंचते हैं.

Abhitab Namdeo

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