*देवकर में धूमधाम से मनाया गया करवाचौथ: बादलों के पहरे के बीच सुहागिनों को करना पड़ा चांद का लंबा इंतजार*

नगर देवकर में इस वर्ष करवाचौथ का पर्व पारंपरिक उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया, हालांकि मौसम के बदले मिजाज ने सुहागिनों की थोड़ी परीक्षा जरूर ली। दो दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश और आसमान में छाए घने बादलों के कारण महिलाओं को चंद्रदर्शन के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। दिनभर निर्जला व्रत रखकर पति की लंबी उम्र की कामना करने वाली महिलाएं आसमान साफ होने की टकटकी लगाए बैठी रहीं।
सुबह से दिखा विशेष उत्साह और सोलह शृंगार
करवाचौथ के पावन अवसर पर नगर के घरों में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल रहा। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर मेहंदी, बिंदी, सिंदूर और चूड़ियों से सोलह शृंगार किया। सुहागिनों ने अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन के साथ-साथ परिवार की सुख-समृद्धि के लिए पूरे दिन निर्जला उपवास रखा।
विधि-विधान से हुई पूजा-अर्चना
शाम ढलते ही महिलाओं ने सुंदर थालियां सजाकर विधि-विधान से करवाचौथ माता की पूजा-अर्चना की और व्रत की कथा सुनी। इस दौरान पूरे परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की गई। पूजा संपन्न होने के बाद महिलाओं की निगाहें आसमान की ओर टिक गईं कि कब चांद के दीदार हों।
बादलों की लुकाछिपी के बीच हुआ चंद्रदर्शन और व्रत का पारण
बारिश और बादलों के कारण चंद्रमा के उदय में हुई देरी से व्रत खोलने का समय भी आगे खिसकता चला गया। हालांकि, मौसम की बाधाएं महिलाओं के उत्साह को कम नहीं कर पाईं।
जैसे ही बादलों की ओट से चंद्रमा के दर्शन हुए, महिलाओं में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्होंने उत्साह के साथ चंद्रमा को अर्घ्य दिया और पति की लंबी उम्र की कामना की। इसके पश्चात, पति के हाथों जल ग्रहण कर महिलाओं ने अपने कठिन निर्जला व्रत का पारण किया। पारंपरिक रीति-रिवाजों और आपसी स्नेह के बीच यह पर्व धूमधाम से संपन्न हुआ।




