*बेमेतरा मितानिन संगठन के हजारों सदस्य अपनी मांगों को लेकर निकले रायपुर मुख्यमंत्री निवास कूच करने कंडरका पठारीघाट पर*

*पुलिस प्रशासन ने रोकी गाड़ी सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक बेमेतरा रायपुर रोड पर रहा चक्काजाम*
बेरला/भिंभौरी:- प्रदेश में इन दिनों मितानिन के समस्त जिला संगठन के सदस्यों ने प्रदेश सरकार द्वारा मोदी की गारंटी नामक चुनावी घोषणा पत्र 2023 में किया गया वादा मितानिन कार्यक्रम में कार्यरत मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एनएचएम में संविलियन किया जाए। चुनावी घोषणा पत्र 2023 में किया गया वादा मितानिन कार्यक्रम में कार्यरत मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेश्क फेसलिटेटर, ब्लॉक कोआर्डिनेटर की वेतन में 50 प्रतिशत किया जाए। मितानिन कार्यक्रम में कार्यरत मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेश्क फेसिलिटेटर, ब्लॉक कोआर्डीनेटर, एनजिओ के अंतर्गत कार्य नहीं करने, मितानिन के हितों को ध्यान में रखते हुए ठेका प्रथा बंद करने सहित आदि तीन सूत्रीय मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन तेज कर दिया है। जिसके चलते दो दिवस पूर्व दो सितंबर को ही रायपुर जिला अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी द्वारा चार सितंबर को तुता ग्राम धरना स्थल जाने की अनुमति प्राप्त की जा चुकी थी। किन्तु गुरुवार की सुबह से ही बेमेतरा जिला सहित लिमाही चौक बेरला, कंडरका चौक आदि कई स्थानों पर मितानिनों की गाड़ी पुलिस प्रशासन द्वारा रोका जाने लगा। लगभग दो हजार मितानिनों ने राजधानी रायपुर सीएम निवास से लेकर धरना स्थल तुता ग्राम तक अपनी-अपनी मांगों की यात्रा पूरी करने हेतु तैयारी के साथ बेमेतरा से प्रातः 10 बजे से खारून नदी पर निर्मित ग्राम कंडरका पठारीडीहघाट पुल पहुंच चुके थे। जहां उन्हें कंडरका चौकी पुलिस प्रशासन के द्वारा रोक लिया गया। जिसके पश्चात अपनी मांगों को लेकर जिले भर के हजारों मितानिन कार्यकर्ताओं ने रायपुर जिले के ग्राम पठारीडीह घाट से कंडरका होते हुए बेमेतरा जाने वाले मुख्य मार्ग पर ही चक्काजाम कर दिया। जो कि शाम चार बजे तक चला। किन्तु हजारों की संख्या में मितानिनों के द्वारा अपनी मांगों को लेकर बेमेतरा रायपुर मुख्य मार्ग पर चक्काजाम किए जाने के बावजूद कोई आला अधिकारी उनकी सुध लेने दिनभर होने के बाद भी नही पहुंचा। इससे आम जनमानस सहित यातायात राहगीरों को भारी समस्या से जूझना पड़ा। चक्काजाम की स्थिति होने कारण पूरे दिन लोगो को खड़ा होना पड़ा। साथ ही काम करने वाले मजदूर व जरूरी कार्य पर बहुत प्रभाव पड़ा है। इस समस्या पर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं होने पर सवाल खड़ा हो रहे है।




