फेंकें नहीं, केले के छिलके से ऐसे बनाएं ‘काला लिक्विड खाद’, गार्डन से खेत तक करें उपयोग, 10 गुना बढ़ेगा फलन
रांची: अक्सर लोग केला खाने के बाद उसके छिलकों को कूड़ा समझकर फेंक देते हैं, लेकिन कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह आपके गार्डन और खेतों के लिए किसी ‘ब्रह्मास्त्र’ से कम नहीं है. रांची के प्रसिद्ध कृषि व गार्डनिंग एक्सपर्ट प्रभात बताते हैं कि केले के छिलके में पोटेशियम की मात्रा गूदे से भी अधिक होती है. इसके अलावा इसमें कैल्शियम, जिंक, मैग्नीशियम और ओमेगा फैटी एसिड जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो पौधों के विकास के लिए अनिवार्य हैं.
घर पर कैसे तैयार करें यह जादुई खाद?
प्रभात जी ने इस मल्टी-पर्पज लिक्विड खाद को बनाने की बेहद सरल विधि साझा की है. इसके लिए आपको किसी महंगे उपकरण की जरूरत नहीं है, बस घर में बेकार पड़ी बाल्टी या खेतों के लिए बड़े ड्रम का इस्तेमाल किया जा सकता है.
ऐसे बनाएं खाद: एक बाल्टी या ड्रम को आधा पानी से भर लें. अब घर में निकलने वाले केले के छिलकों को हर दिन इसमें डालते रहें.पानी का रंग पड़ेगा काला: लगभग 24 घंटे के भीतर आप देखेंगे कि पानी का रंग धीरे-धीरे काला होने लगा है. दो-तीन दिनों में यह पूरी तरह काला हो जाता है. दरअसल, यह पानी और पोटेशियम के बीच होने वाली रासायनिक प्रतिक्रिया का परिणाम है.
चूना मिलाना ना भूलें: एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि इस घोल में लगभग आधा किलो चूना मिला दें. चूना न केवल मिट्टी की अम्लता (Acidity) को कम करता है बल्कि उसके pH लेवल को भी बैलेंस करता है.
10-15 दिन का लगेगा समय: जब आप इसमें करीब दो दर्जन छिलके डाल चुके हों और 10-15 दिन बीत जाएं, तब छिलकों को छानकर अलग कर लें. आपका शक्तिशाली लिक्विड खाद तैयार है.
पौधों पर चमत्कारिक प्रभाव
यह लिक्विड खाद पौधों के लिए ‘इम्युनिटी बूस्टर’ का काम करती है। प्रभात जी के अनुसार, इसके इस्तेमाल से निम्नलिखित फायदे मिलते हैं:
फूलों की भरमार: जिन पौधों में फूल नहीं आ रहे थे, वहां कलियां खिलने लगती हैं.
मिट्टी की उर्वरता: यह मिट्टी की संरचना में सुधार करता है और उसे अधिक उपजाऊ बनाता है.
कीटों से बचाव: पौधों का इम्यून सिस्टम मजबूत होने से उन पर कीड़े और बीमारियों का असर कम हो जाता है.
बेहतर फलन: खेतों में इस्तेमाल करने पर फसल की गुणवत्ता और वजन दोनों में 10 गुना तक सुधार देखा जा सकता है.
एक अतिरिक्त टिप्स
अगर संभव हो, तो इस घोल में थोड़ा सा गोमूत्र भी मिलाया जा सकता है. हालांकि यह वैकल्पिक है, लेकिन इसे मिलाने से खाद की शक्ति और अधिक बढ़ जाती है. तो अगली बार केले का सेवन करने के बाद उसके छिलके फेंकने के बजाय उसे अपनी मिट्टी की ‘सेहत’ सुधारने के काम में लाएं.




