*राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारियों की हड़ताल: मांगों और शासन के रुख पर विवाद*

बेमेतरा, 6 सितंबर 2025 — छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी 10-सूत्री मांगों को लेकर 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। यह आंदोलन अब 20वें दिन में प्रवेश कर चुका है और कर्मचारियों ने इसे और भी उग्र करने का फैसला किया है। संघ का आरोप है कि सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण वे यह कदम उठाने को मजबूर हुए हैं। उनका कहना है कि 160 से अधिक ज्ञापन देने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
सरकार और कर्मचारी आमने-सामने
एनएचएम संघ के जिलाध्यक्ष पूरन दास, बृजेश दुबे और डॉ. अभिषेक यादव ने बताया कि 2023 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने घोषणापत्र में कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान का वादा किया था। सरकार बनने के 20 महीने बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे निराश होकर कर्मचारी पहले भी कई प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
संघ का दावा है कि स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि उनकी कुछ मुख्य मांगों का समाधान केंद्र सरकार की अनुमति पर निर्भर है, जबकि संघ का मानना है कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और राज्य सरकार ही इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने भारत सरकार के संयुक्त सचिव मनोज झालानी के एक पत्र और सूचना के अधिकार से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि नियमितीकरण और अन्य सुविधाओं के लिए राज्य सरकार ही जिम्मेदार है।
10 सूत्री मांगें:
* संविलियन (जॉब सुरक्षा)
* पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना
* ग्रेड पे का निर्धारण
* कार्य मूल्यांकन पद्धति में सुधार
* लंबित 27% वेतन वृद्धि
* नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण
* अनुकंपा नियुक्ति
* मेडिकल या अन्य अवकाश की सुविधा
* स्थानांतरण नीति
* न्यूनतम ₹10 लाख का चिकित्सा बीमा
शासन के दावों पर कर्मचारियों की आपत्ति
सरकार ने कुछ मांगों पर सहमति जताने की बात कही है, लेकिन कर्मचारी संघ ने इन पर आपत्ति जताई है:
* ट्रांसफर नीति: सरकार ने कमेटी का गठन किया है, लेकिन संघ का कहना है कि पहले भी कई कमेटियाँ बन चुकी हैं जिनका कोई परिणाम नहीं निकला। इस कमेटी के काम की भी कोई समय-सीमा तय नहीं है।
* सीआर व्यवस्था: संघ ने एक अपीलेट अथॉरिटी के गठन को अपर्याप्त बताया। उनकी मांग है कि जब तक अपीलेट अथॉरिटी अंतिम फैसला नहीं दे देती, तब तक किसी भी कर्मचारी को सेवा से न हटाया जाए।
* ₹10 लाख का कैशलेस बीमा: इस संबंध में कोई सर्कुलर जारी नहीं हुआ है। संघ का कहना है कि वे आयुष्मान भारत के माध्यम से बीमा लेने को सहमत नहीं हैं और हर साल कर्मचारी कल्याण के लिए आवंटित ₹5 करोड़ की राशि बिना इस्तेमाल के लैप्स हो जाती है।
* वेतन वृद्धि: 27% लंबित वेतन वृद्धि को 5% करने की बात कही गई है, लेकिन इसका भी कोई सर्कुलर जारी नहीं हुआ है।
* सवैतनिक अवकाश: इस पर सर्कुलर तो जारी हुआ है, लेकिन संघ का कहना है कि अवकाश के आवेदन पर राज्य कार्यालय द्वारा निर्णय लेना व्यावहारिक नहीं है। यह निर्णय जिला स्तर पर ही लिया जाना चाहिए।
आंदोलन और दमनकारी कार्रवाई
आंदोलन के दौरान सरकार ने 24 घंटे में काम पर लौटने की चेतावनी दी, जिसके विरोध में कर्मचारियों ने राज्य स्वास्थ्य भवन का घेराव किया और पत्र की प्रतियाँ जला दीं। इसके बाद मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की गई, लेकिन शाम को ही 29 पदाधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इसके विरोध में 4 सितंबर को पूरे प्रदेश के कर्मचारियों ने सामूहिक त्यागपत्र देकर आंदोलन को और तेज कर दिया।
जनता को हो रही परेशानी
हड़ताल के कारण पोषण पुनर्वास केंद्र, स्कूलों और आंगनवाड़ियों में स्वास्थ्य जाँच, टीबी और मलेरिया की जाँच, प्रसव, टीकाकरण और नवजात शिशु स्वास्थ्य केंद्र जैसी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ बाधित हो गई हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एनएचएम संघ ने सरकार से तत्काल बातचीत के माध्यम से इस मुद्दे का हल निकालने की अपील की है। इस प्रेस नोट को जारी करने के दौरान जिलाध्यक्ष पूरन दास, बृजेश दुबे, डॉ. अभिषेक यादव सहित कई पदाधिकारी और कर्मचारी
बड़ी संख्या में उपस्थित थे।




