क्षेत्र में दहशत भैंस चराते हुए कान्हा कोर जोन में पहुंचना बन गया जानलेवा

बाघिन ने किया हमला, चरवाहे की आधी देह मिली, नाती ने भागकर बचाई जान
क्षेत्र में दहशत भैंस चराते हुए कान्हा कोर जोन में पहुंचना बन गया जानलेवा
नईदुनिया न्यूज, बोडला चिल्फी थाना क्षेत्र के सूपखार जंगल में रविवार सुबह सामने आई दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके की दहला दिया। सिंघनपुरी निवासी 65 वर्षीय चरवाहे गुनीराम यादव शनिवार सुबह भैंस चराने निकले थे, लेकिन रात तक घर नहीं लौटे। रविवार सुबह सूपखार परिक्षेत्र क्रमांक 314, थाना मंडला के घने जंगल में उनकी आची देह बरामद हुए शरीर पर गहरे दांतों और पंजों के निशान पाए गए, जिससे स्पष्ट हो गया कि उन पर हमला किसी सक्रिय बाधिन ने किया था।
स्वजन ने बताया कि गुनीराम अपने नाती के साथ रोज की तरह भैंस चराने निकले थे। भैंसों के पीछे पीछे वे अनजाने में जंगल के उस हिस्से तक पहुंच गए, जहां से कोर जोन शुरू होता है। कोर क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील माना जाता है और यहां वन्यजीवों की गतिविधि अधिक होती है। इसी क्षेत्र में घनी घास के भीतर छिपी बाधिन ने तेज झपट्टा मारकर उन पर हमला किया। बाधिन ने उन्हें गिराया और जंगल की दिशा में घसीट कर ले गई। घटना के समय उनके साथ मौजूद नाती ने पूरा हमला अपनी आंखों से देखा। अचानक हुए हमले से भयभीत नाती जान बचाकर गांव की तरफ भागा और परिवार को जानकारी दी।
रात में स्वजन ने चिल्फी थाना में गुमशुदगी दर्ज कराई। सूचना मिलते
बीते वर्ष ट्रैप कमरे में शिकार करते कैद हुआ बाप।
यह घटना पूरी तरह कौर जोन के भीतर हुई है, जहां मानव प्रवेश वर्जित है। संयुक्त सचिंग के बाद शव बरामद किया गया। ग्रामीण चरवाही के
ही कवर्धा वन विभाग और कान्हा टाइगर रिजर्व की संयुक्त टीमें रातभर सर्चिग में जुटीं। घना जंगल, अंधेरा और वन्यजीवों की सक्रियता के कारण खोज अभियान चुनौतीपूर्ण रहा। आखिरकार रविवार सुबह मध्यप्रदेश सीमा के भीतर जंगल में आधी देह बरामद हुई। घटनास्थल पर गहरे पंजों के निशान, घसीटने के रास्ते और खून के धब्बे मिले। वन विभाग ने माना कि हमला संभवतः उस चाधिन द्वारा किया गया, जी इलाके में अपने शावकों के साथदौरान सीमाओं का पालन करें, क्योंकि प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश अत्यंत खतरनाक हो सकता है।
-निखिल अग्रवाल, डीएफओ
सक्रिय हैं। शाक्कों की मौजूदगी में बाधिने अत्यधिक आक्रामक रहती हैं।
वन विभाग का कहना है कि जहां घटना हुई वह कान्हा कोर जोन का केंद्रीय हिस्सा है, जहां किसी भी प्रकार का मानव प्रवेश बन्यजीव सुरक्षा नियमों के विरुद्ध है। विभाग ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मुआवजे की संभावना बेहद कम होती है, क्योंकि नियमों के अनुसार प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश अवैध माना जाता है।
राष्ट्रीय उद्यान का संवेदनशील और संरक्षित भाग है कोर जोन
कोर जोन राष्ट्रीय उद्यान का सबसे संवेदनशील और संरक्षित भाग होता है. जहां बाध, बाधिन, तेंदुए और अन्य वन्यजीव प्राकृतिक रूप से रहते और शिकार करते हैं। यह क्षेत्र वन्यजीवी के प्रजनन, शिकार और गतिविधियों के संरक्षण हेतु निर्धारित होता है। यहां किसी भी प्रकार की मानवीय गतिविधि सख्ती से वर्जित है।
इसलिए प्रतिबंधित है कोर जोन में प्रवेश
कोर एरिया में मानव प्रवेश इसलिए
रोका जाता है क्योंकि यहां वन्यजीव
अत्यधिक सक्रिय रहते हैं और हमला
होने की संभावना बहुत अधिक होती
है। बाधिन अक्सर शावकों के साथ
रहती है, जिसके कारण वे अत्यधिक
आक्रामक हो जाती है। मानव
उपस्थिति से वन्यजीवों पर तनाव
बढ़ता है और दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। गुनीराम का शरीर मध्यप्रदेश के सूपखार परिक्षेत्र क्रमांक 314 के घने जंगल में मिला। घटनास्थल पर खून के धब्बे, पंजों के गहरे निशान और शव को घसीटकर ले जाने के स्पष्ट संकेत मिले, जिससे टीमों ने पुष्टि की कि हमला अत्यंत करीब से और अचानक हुआ था।



