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*बारिश व पानी कमी से खेत सूखने पर धान की फसल में सूखा रोग से पड़ी पीली, किसान चिंतित*

 

बेरला:- अंचल में लगातार 15 से 18 दिन तक बारिश न होने व मोटरपम्प भी बन्द पड़े होने से खेत में दरारें पड़ गई। जलापूर्ति की कमी धान की फसल पर प्रभाव पड़ा। फसल सूखने के कारण पीली व सूखा रोग पड़ने से धान में गंभीर बीमारी का प्रकोप पड़ने लगे है। जिससे किसान और भी ज्यादा चिंता में पड़ गए। इस वर्ष मौसम व बारिश की अनुमान ज्यादा होने के कारण किसान बढ़ चढ़कर रोपाई व परहा धान लगाया था। लेकिन बीच में बारिश थम गई। साथ ही मोटर पम्प भी गर्मी के चलते बन्द पड़े हुए है। इसके अलावा बिजली आपूर्ति में भी भारी दिक्कत होने के कारण किसान और भी ज्यादा चिंता में पड़ गए। इसी के चलते खेत में सभी तरफ से पानी की कमी के कारण धान की फसल सुख गए और पिला पन आने से गंभीर बीमारी देखने को मिल रहे है। आपको बता दें कि पोला पर्व के दिन पूरे दिन मौसम व बादल में काली घटा छाए रहे। साथ ही रिमझिम बूंदाबन्दी कर बारिश हुआ। किसान तेज बारिश की उम्मीद लगाए थे। लेकिन पूरा दिन बीत गए फिर भी जमकर बादल बरसे नहीं ताकि खेत में पानी भर सके। उम्मीद टूटती जा रही किसान ऊपर आसमान की ओर नजर माथे पर अपनी हथेली टिकाये देख रहे। आखिर कब होगी जमकर बारिश, भगवान से विनती व कामना कर रहे कि जमकर बारिश कर फसल को बचा लें। बारिश की कमी और बिजली आपूर्ति नहीं होने से खेत और भी सुख गए। अंचल में धान की फसल की इस बार बंपर पैदावार पर पानी फिरता नजर आ रहा है। क्योंकि धान की फसल में शीथ व्लाइट और वेक्टीरियल लीफ व्लाइट रोग का प्रकोप शुरू हो गया है। वहीं खेतों में पानी भरा होने के बाद भी अचानक सूख रहे पौधों के चलते किसानों में हड़कंप मच गया है। ऐसे में किसान बाजार से कई तरह की दवाइयां मिलाकर उसका स्प्रे करने में जुटे है।

 

दरअसल इस साल बारिश तो खास नहीं हुई है, बेरला ब्लॉक सहित जिले में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष बारिश पर्याप्त मात्रा में भी बहुत कम बारिश हुई है। जिसके चलते स्थानीय गांव में बांध व तालाब में जल संरक्षण किया जाता है उसमें भी पानी की भराव ठीक से नहीं हुई है। ब्लॉक बेरला के ग्राम मनियारी की बांध पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष जल भराव की कमी देखने को मिला लगभग 4 फिट जलभराव की कमी हुई है। जिससे किसान को जलापूर्ति नहीं हो सकती। गांव के किसान ने बताया कि इस बार बांध में बहुत कम पानी है। बांध का पानी छोड़ने पर मुश्किल से दो दिन ही पानी चल पाएगा। पर्याप्त किसान को पानी नहीं मिल पायेगा। वर्तमान में धान के पौधों में शीथ व्लाइट और वेक्टीरियल लीफ व्लाइट रोग का प्रकोप देखने को मिल रहा है। इससे धान के पौधे अचानक से सूखने लगे है। जिस वजह से किसानों की चिंताएं बढ़ने लगी है। शीथ ब्लाइट रोग के चलते धान का पौधा पीला पड़ने लगे है। शीथ ब्लाइट रोग का बोटेनिकल नाम सरोक्लेजियम ओराईजी है। यह फफूंद जनक रोग है तथा इस रोग का वायरस धान की फसल में हवा, पानी के अलावा पिछले वर्ष की प्रभावित मृदा से भी सकता है। रोग का वायरस बासमती किस्म को ही अपना निशाना बनाता है। बीमारी का सबसे पहले प्रकोप धान के पौधे के तने पर होते नजर आ रहे है तथा उस पर कालिमा लिए हुए लंबे धब्बे पड़ने शुरू हो जाते हैं जो पौधे के एक-एक पत्ते को सुखा कर बाली में दूध लेकर जाने वाली पाइप गांठों को गला दे रहे तथा पौधा मर रहा है।

GAUTAM BEMTRA

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