*सहसपुर-राजपुर मार्ग में ग्रामीणों को दिखा बाघ, तीसरे दिन में प्रशासन के हाथ खाली*

*बेमेतरा:-* साजा फॉरेस्ट रेन्ज में निरन्तर अपनी मूवमेंट एवं एक्टिविटी से सुर्खियां बटोर रहा सन्दिग्ध बाघ की धमक अब तीसरे दिन भी लगातार रिहायशी क्षेत्र में देखने को मिला। इस बार नगर देवकर से महज 07 किलोमीटर दूर अन्तर्ज़िला क्षेत्र सहसपुर-राजपुर मार्ग पर दोपहर में महिलाओं द्वारा देखने का दावा किया गया। इसके बाद नगर साजा के गन्ने फार्म में ड्रोन कैमरे व अन्य जरूरी उपकरण के आधार पर तलाशी अभियान चला रही वन विभाग की टीम तत्काल सहसपुर क्षेत्र पहुंची। जहां पर डीएफओ- सीएस शंकर सिंह परदेशी के साथ पूरा वन अमला के साथ मौके पर पहुंचे जहाँ साजा वन रेंज के साथ धमधा, गंडई व सहसपुर लोहारा के इन्टरडिवीजन अफसर की भी मदद ली गयी, परन्तु देर रात तक कोई खास सुराग सन्दिग्ध बाघ का नही मिल सका। जिससे गम्भीर सम्वेदनशील मामले पर प्रशासन की सक्रियता एवं कार्यशैली पर सवाल उठने लगा है।
दरअसल फॉरेस्ट मुक्त दुर्ग वन मण्डल अंतर्गत बेमेतरा ज़िला में विगत तीन दिनों से बाघ के दस्तक के दावे चर्चाओं के केंद्र में बना हुआ है, जो फिलहाल तक आम लोगों पर किसी भी प्रकार का हमला तो नही किया है, किंतु प्रभावित क्षेत्रों में दहशत जबरदस्त देखने को मिल रहा है। हालांकि सन्दिग्ध बाघ के देखे जाने के दावे एवं कदमचिन्ह के मिलने के बाद वन विभाग की तैयारियों काफी नही है, जिसके कारण सन्दिग्ध बाघ प्रशासन की पहुंच से अबतक दूर ही है। बताया जा रहा है कि इस कार्य के तलाशी अभियान में वनकर्मी कम होने के कारण राजस्व एवं पुलिस विभाग के अफ़सरो व स्टॉफ का सहारा लिया जा रहा है, जो वनरहित क्षेत्र में लगातार पदस्थ होने के कारण अनुभव की कमी एक चुनौती बनी हुई है। वही अबतक फारेस्ट द्वारा पर्याप्त ड्रोन भी उपयोग में नही लिया गया है जिसके चलते टाइगर के मूवमेंट्स का स्पष्ट पता नही चल सका है।
इस सम्बंध में फारेस्ट एक्सपर्ट का कहना है कि जंगली जानवर की श्रेणी में राष्ट्रीय पशु बाघ काफी बड़ा माना जाता है, जो मांसाहारी होने के साथ आमतौर पर काफी चालाक शिकारी होता है, जिसके लिए वह एक सीमित के बीच ही अपनी मूवमेंट्स व एक्टिविटी करता है किंतु जंगल नष्ट होने पर खान-पान एवं रहन-सहन के लिए अथवा कभी-कभार यह जँगली जीव प्रवास-सहवास के बीच प्रतिद्वंद्वी से सँघर्ष के दौरान अपना मूल वन संरक्षित क्षेत्र छोडकर रिहायशी इलाकों में भटककर पहुंच जाता है, ताज़ा सन्दिग्ध जानवर बाघ भी इसी तरह ही साजा रेन्ज में दाखिल हुआ है। जिसके लिए वह सुरही नदी के कछार का सहारा लेकर गंडई या लोहारा क्षेत्र से होकर रास्ता भटक गया, जो फिलहाल लगातार तीन दिनों से ग्रामीणों को नज़र आ रहा है।हालांकि अभीतक के स्थितियों को देखकर लग रहा है यहां धमका बाघ शांत प्रवृत्ति का है, जो अभीतक किसी पर जानलेवा हमला नही किया है। वैसे इस परिस्थिति में वन विभाग द्वारा बाघ को निगरानी में लेकर उसके अपने रास्ते जाने के लिए व्यवस्था किया जाएगा और खतरे की स्थिति में उसे ट्रेंकुलाइज कर जंगल मे छोड़ा जाएगा। जिसकी वन विभाग द्वारा उच्च अफसरों के मार्गदर्शन में सारी तैयारी की जा रही है।




