पत्नी और बच्चों के जीवित रहने पर मां को विरासत में हिस्सा नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

पत्नी और बच्चों के जीवित रहने पर मां को विरासत में हिस्सा नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि कोई पुत्र बिना वसीयत (इंटेस्टेट) के मृत्यु को प्राप्त होता है और उसके पीछे पत्नी व बच्चे (प्रत्यक्ष वंशज) जीवित हैं, तो उसकी मां को भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलेगा।
जस्टिस ज्योति एम ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें मृतक की पत्नी और बच्चों द्वारा दायर उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate) की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी गई थी कि मृतक की मां भी कानूनी उत्तराधिकारी है।
मामला क्या था?
मृतक, जो ईसाई धर्म के थे, ने कोई वसीयत नहीं छोड़ी थी। उनके पीछे पत्नी और दो बच्चे जीवित थे। उन्होंने Reliance Group of Companies के शेयरों में निवेश किया था, लेकिन किसी नामित व्यक्ति (nominee) को नामित नहीं किया था। शेयरों के हस्तांतरण के लिए सक्षम न्यायालय से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र की आवश्यकता बताई गई।
इसलिए पत्नी और बच्चों ने भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 372 के तहत बेंगलुरु की सिटी सिविल एवं सेशंस कोर्ट में याचिका दायर की। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने मां के दावे को देखते हुए याचिका खारिज कर दी। इसके विरुद्ध अपील हाईकोर्ट में दायर की गई।
हाईकोर्ट का निर्णय
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट ने अधिनियम की धारा 32 और 33 का गलत अर्थ लगाया। न्यायालय ने कहा:
यदि कोई व्यक्ति बिना वसीयत के मृत्यु को प्राप्त होता है और उसके पीछे पत्नी व प्रत्यक्ष वंशज (बच्चे) हैं, तो संपत्ति उन्हीं में विभाजित होगी।
धारा 33 के अनुसार, ऐसी स्थिति में 1/3 हिस्सा पत्नी को और 2/3 हिस्सा बच्चों को मिलेगा।
मां को केवल तब उत्तराधिकार मिलता है जब मृतक के पीछे कोई प्रत्यक्ष वंशज न हो।
न्यायालय ने कहा कि चूंकि मृतक के पीछे पत्नी और बच्चे जीवित हैं, इसलिए मां को संपत्ति में कोई कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है। ट्रायल कोर्ट का आदेश कानून के विपरीत और अस्थिर (unsustainable) है।
अदालत ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी किया जाए।
इस प्रकार, अपील स्वीकार कर ली गई।



