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*देवउठनी एकादशी के दिन गौरा गौरी पर्व धूमधाम से मनाया गया*

देवकर/कोदवा:- देवउठनी एकादशी के दिन महिलाएं और पुरुष गीत गाकर गौरी गौरा को प्रसन्ना करते हैं आदिवासी समाज परंपरा के अनुसार 20वर्षों से ग्राम कोदवा में देवउठनी पर गौरा-गौरी की पूजा की जाती हैं। एक दिन पहले सुबह ग्राम के लोगों द्वारा मिट्टी लाकर गौरा गौरी की मूर्ति बनाई जाती हैं फिर रात में मूर्ति को आकर्षक रूप से सजाकर गौरा-गौरी की बारात बाजे-गाजे के साथ निकाल कर गौरा चौक में स्थापित किया जाता है और गौरा-गौरी की पूजा अर्चना व गीत गाकर गांव के देवी देवताओं को प्रसन्ना किया जाता है। समस्त ग्रामवासियों ने और वरिष्ठ पत्रकार और अध्यक्ष राकेश पान्डेय ने गौरा गौरी मूर्ति की पूजा अर्चना की। दोपहर को बाजे-गाजे व आतिशबाजी के साथ गांव से सभी गलियों में भ्रमण कर गौरा-गौरी का विसर्जन किया गया। गांव के तालाब में पूरे विधि विधान के साथ गौरा-गौरी का विसर्जन किया गया। कार्यक्रम में सीता उ गोड़अंचल में देवउठनी एकादशी, तुलसी विवाह, गन्ना पूजा के साथ साथ महिलाओं व बालिकाओं ने घरों घर में अनेक प्रकार रंगोलियां बनाईं। छत्तीसगढ़ी लोक कला एवं लोक संस्कृति की अपनी पहचान है जो बहुत मनमोहक है। हर तीज त्योहारों में छत्तीसगढ़ी लोक कला व लोक संस्कृति की झलक हमें देखने को मिलती है। वर्तमान में युवा पीढ़ी में इस संस्कृति के प्रति रुझान कम होते दिख रहा है।आदिवासी गोड़ समाज ने गौरा गौरी को धूमधाम से मनाया गया इस प्रकार ,सिताहु धुवेँ ,सिताराम धुवेँ, बिसाल धुवेँ, गोपाल धुवेँ, डाकवर धुवेँ ,नरोत्तम धुवेँ ,शिवकुमार धुवेँ, समाज के और भी लोग शामिल हुए।

GAUTAM BEMTRA

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