*■करमाल(बेरला) में काव्यगोष्ठी का सफल आयोजन■*

“यथार्थ कल्पना के संसार हे कविता ।
प्रसाद निराला गुप्त सुकुमार हे कविता ।
कला अउ संगीत के रखवार हे कविता ।

कवि के जिनगी के आधार हे कविता ।” पढ़कर सभी का मन मोह लिया । हास्य के नवीन हस्ताक्षर कवि ईश्वर निषाद ने अपनी छत्तीसगढ़ी रचना धोखा खाए हंव प्रस्तुत कर सबको गुदगुदाया जबकि वरिष्ठ ग़ज़लकार जगदीश सोनी बेरलाहा ने पढ़ा मै हूँ नसीब का मारा । युवा कवि विकास कश्यप ने नई कविता के रूप में आनंद का इत्र पढ़ा वंही नरेंद्र साहू ने देवारी तिहार पर समसामयिक रचना प्रस्तुत की । नारी के शक्ति के रूप में उपस्थित कवियत्री सरस्वती साहू ने माता संतोषी की एक सुमधुर गीत प्रस्तुत कर सब में भक्ति का भाव जगाया वहीं कवियत्री मानसी मानस ने श्रृंगार की एक बेहतरीन रचना का पाठ किया जबकि राधिका पटेल ने छत्तीसगढ़ी गीत मोर नंगरिहा प्रस्तुत कर किसानों की पीड़ा व्यक्त की । गीतकार मूलचंद साहू ने छत्तीसगढ़ी गीत सुरता सियान के पाठ किया गीतकार डॉ. चुरामन साहू ने पढ़ा तुम तो अपने हो जबकि डॉ.उत्तम देवांगन ने जपले राम के माला प्रस्तुत की और कवि दीपक (शिक्षक) नेअपनी आध्यात्मिक रचना उखरा रेंगत पाँव छोलागे प्रस्तुत कर पुनः सबको भक्ति रस में सराबोर कर दिया । कवि सुरेश निर्मलकर ने अपनी रचना चलो आज फिर उनसे मुलाक़ात की जाए के माध्यम से समा बांध दिया जबकि मै कविता की किताब पढ़ता रह गया प्रस्तुत कर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राजेंद्र प्रसाद पाटकर ने अपने साहित्य प्रेम को उजागर किया । गोष्ठी का संचालन कर रहे ताकेश्वर साहू बचपन ने हास्य कविता मोबाइल फ़ोन का चक्कर पढ़कर सभी को ख़ुश कर दिया ।




