*सलधा में बारिश की पहली बौछार में धुलने लगी करोड़ो की तटबन्ध प्रोजेक्ट, घटिया निर्माण से ग्रामीणों में आक्रोश*

बेमेतरा:- जल संसाधन विभाग बेमेतरा अंतर्गत ब्लॉक बेरला के ग्राम पंचायत सलधा में सपाद लक्षेश्वर धाम सलधा शिवनाथ नदी के तट पर करोड़ों की लागत से तटबन्ध का निर्माण कार्य लगभग 3-4 माह पूर्व बने हुए कि दर्जनों स्थानों पर दरार व पचरी की ढांचे धसने लगी। इससे अंचल वासियों ने बताया कि ठेकेदार द्वारा घटिया व गुणवत्ताहीन निर्माण के चलते कई जगह दरार आ गई है। ठेकेदार द्वारा लेआउट व स्टिमेन्ट के खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए नियम व माप दण्डो को दरकिनार कर निर्माण कार्य किया जाना गुणवत्ताहीन व घटिया निर्माण कार्य को अंजाम दिया गया। वही तटबन्ध निर्माण कार्य में बिना इंजीनियर व ठेकेदार की कमी के कारण कहीं न कहीं निर्माण होने की अंदेशा लगाया जा सकता है जिनके कारण घटिया मटेरियल की उपयोग से निर्माण होने से कई जगहों पर दरार आ गई है। आपको बता दें कि बेमेतरा जिला में सपाद लक्षेश्वर धाम सलधा सवा लाख शिवलिंग का मंदिर बन रहे है। आने वाले भविष्य में यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन व मोक्ष्य की प्राप्ति के लिए आएंगे। माना जाता है कि यह मंदिर एशिया का पहला ऐसा मंदिर जहां सवा लाख शिवलिंग की प्राणप्रतिष्ठा किया जाएगा। मंदिर का कार्य अब भी प्रगति पर है। श्रद्धालु अपनी सेवा व सहयोग से मंदिर निर्माण कार्य में अपना योगदान व भगवान शिव आशीर्वाद ले रहे है। वही मंदिर समीप जीवनदायिनी शिवनाथ नदी के तट पर तटबन्ध का निर्माण कार्य करोड़ों राशि की लागत से किया गया। या फिर राशि की कमी होने के कारण ठेकेदार सही निर्माण नहीं कर पाए या फिर इंजीनियर व एसडीओ सहित कार्यपालन अभियंता जलसंसाधन विभाग द्वारा जांच की कमी होना घटिया निर्माण किया गया। बिल्कुल ही जांच का विषय है जो तटबन्ध निर्माण में लापरवाही बरती गई है। धार्मिक स्थल की जगह पर गुणवत्ताहीन व घटिया निर्माण कार्य करना ठेकेदार की इस कार्य पर कई कथित सवाल उत्पन्न हो रहे है। वही संबंधित विभाग इस ओर नजरअंदाज करना करोड़ों के निर्माण कार्य में लापरवाही सामने आ रहे है। इसके साथ ही पचरियों में कई जगह शूल की भांति छंड व तार की नुकीले निकले हुए है जो बड़ी दुर्घटना व चोटिल होने की बड़ी संभावना बना है। वही इस निर्माण कार्य में घटिया सीमेंट की उपयोग करने के कारण पचरियों व परतों की सीमेंट उखड़ रहे है। साथ ही गिट्टी भी उखड़कर निकल रहे है। ऐसा प्रतीत हो रहे है कि इंजीनियर मौके जांच नहीं किया होगा या फिर जांच की कमी होने के कारण ठेकेदार द्वारा बिना प्रशिक्षु मिस्त्री व लेवर के भरोसे निर्माण कार्य किया गया होगा। जिसके चलते बिना माप दण्ड की खुलेआम धज्जियां उड़ाया गया। वही पचरियों में समान समतल, सीधा व फ्लिसिंग साफ-सफाई तक काम नहीं हुए है। आपको बता दें कि पचरियों के किनारे हो या बीच के स्थानों पर ऐसा कोई जगह नहीं जहां पर गिट्टी की नुकीले नहीं हो। पानी की लूप में ढके होने के कारण कई जगह खतरा बना हुआ है।
लिहाजा बेरला ब्लॉक के ग्राम पंचायत सलधा सपाद लक्षेश्वर धाम सलधा शिव गंगा आश्रम के समीप शिवनाथ नदी के तट पर 3-4 महीने ही करोड़ो की तटबन्ध निर्माण हुआ है। बारिश का मौसम लगे लगभग एक महीने हुए है। वही बीते कुछ दिनों से लगातार एक सप्ताह से रिमझिम बारिश हुए और नदी नाले उफान पर आ गए। वर्षा ऋतु के पहली बारिश ने करोड़ों की बनी तटबन्ध की गुणवत्ताहीन व घटिया निर्माण की पोल खोल दी। लोगों का मानना है कि यह तटबन्ध पहली बारिश में कई जगह पर दरार व ढांचे धंसने लगे है तो आने वाले सालों में यह ढह जाएगा। अभी तो पूरा बारिश का सीजन बचा है। आने वाले समय में कभी-भी ढह सकता है। भविष्य में बड़ी दुर्घटना होने की संभावना जताई जा सकती है।
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इस संबंध में श्रद्धेय दण्डी स्वामी श्रीमज्ज्योतिर्मयानंद सरस्वती जी महाराज सपाद लक्षेश्वर धाम सलधा ने बताया कि शिवनाथ नदी पर बनी तटबन्ध निर्माण को 3 से 4 महीने ही हुए कि कई जगह दरार व ढांचे धंस रहे है। साथ ही छंड, गिट्टी, व सीमेंट की घटिया मटेरियल की उपयोग किया जाना घटिया निर्माण होना पाया गया। इस पर ठेकेदार व संबंधित विभागीय जांच कर सही मरम्मत किया जाए। आने वाले समय में हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन, स्नान व जल के लिए आएंगे तो कही न कहीं घटना के शिकार हो जाएंगे। शासन प्रशासन की राशियों की खिलवाड़ किया जाना गलत है। इस पर जांच कर सुधार करने बड़ी आवश्यकता है।




