*●भिम्भौरी क्षेत्र में गैस पाइपलाइन विस्तार के क्रियान्वयन में गेल इंडिया की मनमानी का आरोप, प्रभावित किसान परेशान●*

*बेमेतरा:-* बेरला अनुविभाग के भिम्भौरी तहसील इलाके के दर्जनभर गाँव मे गेल इंडिया कम्पनी गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य फिलहाल एक साल से निरन्तर चल रहा है, जो अपने कार्यशैली एवं स्वरूप के कारण काफी विवाद व चर्चे में बना हुआ है। शासन-प्रशासन की इस महत्वकांक्षी योजना के क्रियान्वयन में काफी मनमानी एवं लापरवाही देखी जा रही है, जिसका तकाज़ा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। फिलहाल मामला भिम्भौरी क्षेत्र के ग्राम पिरदा, बोरसी, उफरा, गबदा, सिलघट, ढाबा इत्यादि गाँव से कम्पनी द्वारा गैस पाइपलाइन विस्तार के दौरान किसानों की खेतो व उनके फसलो को जमकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। वही प्रभावित किसानों को मुआवजे के वितरण में भी अनियमितता देखी जा रही है। जिससे स्तब्ध ग्राम गब्दा का किसान जीवन साहू अब बेमेतरा में स्थित ज़िला कलेक्ट्रेट जाकर जनचौपाल की सुनवाई में शिकायत करने की तैयारी कर रहा है। उनका कहना है कि बीते शुक्रवार को जब वह गाँव मे ही स्थित अपने आधा एकड़ रकबे के खेत पहुंचे तो उन्होंने पाया खेत मे दो जगह बीच मे खुदाई कर चेम्बर बना दिया गया है जिसकी उन्हें सूचना भी नही दी गयी है, साथ ही इससे पूर्व में भी उनको खेत प्रभावित होने पर फसल क्षतिपूर्ति के रूप में केवल 01 लाख रुपये की राशि प्रदान गयी। जबकि उनके खेत मे तीन पाइप गुजारी गयी है। वही गाँव के ही अन्य किसानों के खेतों से एक पाइप के गुजरने के बावजूद उन्हे 01 लाख रूपये से ज्यादा की राशि कम्पनी द्वारा मुआवजा के रूप में दी गयी है, जो कि काफी गम्भीर है। वही गैस कम्पनी द्वारा प्रभावित इलाके के खेतो में आज भी गड्ढे खोदकर खुला छोड़ दिया जा रहा है जो पशुओ के लिए मुसीबत बना हुआ है।
दरअसल भारत सरकार की देशभर में गैस कनेक्शन से जोड़ने के लिए महत्वाकांक्षी योजन्स के तहत पाइपलाइन का विस्तार किया जा रहा है जिसके माध्यम से गैस उपभोक्ताओं को सीधा गैस की सप्लाई की जाएगी। जिसके लिए फिलहाल मुम्बई से लेकर ओडिसा तक गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य गेल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी इन दिनों छत्तीसगढ़ में पाइप बिछा रही है।
इस सम्बंध में किसानों का कहना है कि कंपनी के द्वारा किसानों से पाइपलाइन बिछाने के बाद पाइपलाइन के दोनों तरफ कुछ मीटर की जमीन उपयोग में ली गई है. इस जमीन पर किसान भविष्य में ना तो कोई निर्माण कर सकता है और नहीं बोरवेल खुदवा सकते हैं. वहीं कंपनी के तरफ से कोई अधिकृत जानकारी भी नहीं दी जा रही है कि किसके लिए यह पाइपलाइन बिछाई जा रही है,इस तरह गुपचुप तरीके से करने के साथ ही मुआवजा वितरण में भी असमानता व भिन्नता देखने को मिल रहा है।




