*●साजा रेन्ज टीम की तलाशी में चौथे दिन भी नही मिल संदिग्ध बाघ, पदचिन्हों को लेकर गाँव-गाँव मे अफवाहों का जोर, वन्यकर्मी को अभियान में हो रही परेशानी●*

*बेमेतरा:-* साजा परिक्षेत्र में सन्दिग्ध बाघ के आहट व दावे को रविवार को पूरे चार दिन हो गए। लेकिन अभी तक फॉरेस्ट विभाग की टीम के हाथ खाली ही नज़र आ रहे है। दरअसल पर्याप्त स्टॉफ, आधुनिक उपकरण एवं अनुभव की कमी के कारण सन्दिग्ध वन्यजीव प्रशासन के पहुंच की जद से अबतक बाहर है। जबकि पूरे प्रभावित क्षेत्रों में दहशत व खौफ का आलम देखने को मिल रहा है। गाँव-गाँव मे हर कोई बाघ के ताज़ा घटनाक्रम को लेकर तरह तरह के किस्से बना रहे है तो कही कही बाघ दिखने खोखले दावे को सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है जो उचित नही है। जिसमे परसबोड़, भनोरा, बोड़, डोंगीतराई सहित इत्यादि गाँव मे अफवाहों का जोर हावी है। हालांकि वन विभाग के अफसरों का कहना है कि ऐसे परिस्थितियों में झूठी खबर या अफवाहे नही फैलानी चाहिए इससे वन्यजीव की तलाशी अभियान में लगी टीम को काफी भ्रामक स्थिति का सामना करना पड़ता है एवं आमजनमानस में भी भ्रांतियां फैलने से डर व भय बढ़ने लगता है।
फिलहाल फॉरेस्ट विभाग द्वारा सन्दिग्ध वन्यजीव को बाघ मानकर सम्भावित इलाकों पर खोजबीन व तलाशी की जा रही है। वही अतरझोला गाँव मे सुरही नदी किनारे खेत पर मिले कदमचिन्ह को सुरक्षित कर सहसपुर लोहारा के परिक्षेत्र अधिकारी-अनुराग वर्मा को सौंपा गया है, जो अपने कार्यक्षेत्र अंतर्गत रणवीरपुर गाँव में गुरुवार को मिले वन्यजीव के फुटप्रिंट्स का मिलान करेंगे, जिसे फिलहाल कवर्धा ज़िला में तेंदुआ मानकर वहाँ भी खोजबीन जारी है। दोनों इलाके में एक ही दिन वन्यजीव दिखने के सम्भावना व कनेक्शन भी जोड़ने की कोशिश की जा रही है। जिसके बाद ही दोनों इलाको में विचरण कर रहे जँगली जीव की पहचान की जाएगी।




