*ग्रामीण अंचल में आकार लेने लगी गणपति जी की प्रतिमा, गणेशोत्सव की तैयारियों में जुटे मूर्तिकार*

*बेमेतरा:-* ग्रामीण अंचलों में गणेशोत्सव पर्व के लिए तैयारियां अभी से शुरू हो गयी है। जिसमे स्थानीय मूर्ति कलाकार अभी से गणेश जी की प्रतिमा को आकार देने का कार्य जुट गए है। ज्ञात हो कि आगामी 07 सितम्बर को गणेश चतुर्थी मनाया जाएगा। जिसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में मूर्तिकार प्रतिवर्ष की भाँति इस बरस भी अपनी कलाकृतियों में हाथ आजमा रहे है। बताया जा रहा है कि मूर्ति कलाकारों द्वारा क़रीब महीनेभर पूर्व से ही पर्यावरण के अनुकूल प्रतिमा बनाया जा रहा है। जिसमे केवल मिट्टी, लकड़ी, पराली एवं जुट की रस्सी व बारदाने के उपयोग कर ग्रामीणों के ऑर्डर के मुताबिक मूर्तियां तैयार की जा रही है। वही इन दिनों सभी मूर्ति निर्माण स्थल पर अपने परिवार व अन्य श्रमिकों के साथ दिनरात मेहनत कर बारीकी से गणपति की मूरत को रूप दे रहे है। जिसमे 1 फीट से लेकर 10-12 फीट तक विशाल मूर्ति भी तैयार किया जा रहा है। जिसकी कीमत ऑर्डर के अनुसार तय की गई है। इस सम्बंध में गाडाडीह एवं परपोड़ी क्षेत्र के देवी मूर्ति निर्माता व मूर्तिकार द्वारा बात किया गया तो उनके द्वारा बताया गया कि क्षेत्र के दर्जनों गाँव में गणेशोत्सव आयोजक समितियो के लिए सैकड़ो प्रतिमा को विभिन्न डिजाइनों में तैयार किया जाता है। जिसमे पर्यावरण का खास ध्यान रखा जाता है। इसके लिए महीनेभर पूर्व ही चिकनी मिट्टी लेकर उसे अच्छे से मताई किया जाता है फिर मजबूत लकड़ी एवं रस्सी का उपयोग कर प्रतिमा के एक रूप को आकार दिया जाता है जिसमे काफी मेहनत से मूर्ति तैयार होता है। वही इसी मेहनत के अनुसार की प्रतिमा की कीमत तय की जाती है जिसमे अंतिम समय मे रंग रोगन एवं सजावट कर गणेशोत्सव समिति के आयोजको को सौप दी जाती है। जिसमे अंतिम में एक चौथाई हिस्सा ही पैसा मेहनताने के रूप में मिलता है। साथ ही उनके द्वारा बताया गया कि गणेशोत्सव पर्व के पश्चात अगले ही दिन शारदीय नवरात्र के लिए दुर्गोत्सव समिति के लिए माँ दूर्गा की प्रतिमा बनाने का कार्य शुरू हो जाता है, जो लगभग एक माह तक इसी कार्य मे लगे होने के बाद ही उन्हें एवं परिवार जनों को आराम मिल पाता है।




