*पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के पैतृकग्राम पतोरा में भीषण जल संकट नल-जल योजना ठप, 5-6 हैंडपंप महीनों से खराब*

बेमेतरा/बेरला:- छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के पैतृकग्राम पतोरा जनपद पंचायत बेरला में भीषण पेयजल संकट गहरा गया है। गांव की नल-जल योजना लंबे समय से ठप पड़ी है, वहीं पानी का एकमात्र सहारा रहे लगभग 5 से 6 हैंडपंप महीनों से खराब होकर शोपीस बने हुए है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। जिस गांव की पहचान प्रदेश के बड़े राजनीतिक चेहरों से जुड़ी है, वहां बुनियादी पेयजल व्यवस्था का ध्वस्त होना पंचायत प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
*15वें वित्त और मूलभूत बजट के दुरुपयोग पर उठे सवाल*
पंचायतों में बुनियादी ढांचा सुधारने और जल आपूर्ति दुरुस्त रखने के लिए 15वें वित्त आयोग एवं मूलभूत मद से लाखों रुपये की राशि आवंटित की जाती है। इसके बावजूद हैंडपंपों की मरम्मत न कराया जाना पंचायत प्रबंधन की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि पर्याप्त बजट उपलब्ध होने के बाद भी रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिससे विकास के सारे प्रशासनिक दावे खोखले साबित हो रहे है।
*जनसेवक रविंद्र भास्कर चौबे ने साधा निशाना*
व्यवस्था की बदहाली और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए जनसेवक रविंद्र भास्कर चौबे ने कहा अधिकारी सिर्फ दफ्तरों में बैठकर खोखले आश्वासन देते हैं, जबकि धरातल पर स्थिति बेहद भयावह है। शासन-प्रशासन और पंचायत के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से स्थानीय लोगों में भारी असंतोष पनप रहा है।
*प्रशासनिक अनदेखी बेमेतरा व बेरला CEO ने नहीं उठाया फोन*
पेयजल की गंभीर स्थिति और ग्रामीणों के आरोपों पर प्रशासनिक पक्ष जानने के लिए जब जनपद पंचायत बेरला के सीईओ दिव्या ठाकुर तथा जिला पंचायत बेमेतरा के सीईओ प्रेमलता पद्माकर से मोबाइल के जरिए संपर्क करने की कोशिश की गई, तो दोनों ही अधिकारियों ने फोन रिसीव करना उचित नहीं समझा। एक तरफ प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री के गांव में ग्रामीण प्यास बुझाने को तरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारियों का फोन न उठाना यह स्पष्ट दिखाता है कि प्रशासन ग्रामीण समस्याओं के प्रति कितना बेपरवाह और असंवेदनशील बना हुआ है।




