ओडिशा सरकार ने राज्य में तंबाकू और निकोटिन से बने सभी उत्पादों पर पूरी तरह से रोक लगाने का बड़ा फैसला किया है. अब ओडिशा में पान मसाला, गुटखा, जर्दा, खैनी, बीड़ी, सिगरेट और इससे जुड़े किसी भी उत्पाद का उत्पादन, पैकेजिंग, भंडारण, वितरण और बिक्री नहीं हो सकेगी. इस संबंध में राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है.
सुप्रीम कोर्ट और FSSAI की गाइडलाइंस के तहत लागू हुआ बैन
सरकार ने यह सख्त कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की गाइडलाइंस के आधार पर उठाया है. यह प्रतिबंध खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत लागू किया गया है, जिससे कानूनन किसी भी तरह की छूट की गुंजाइश नहीं रहेगी.
स्वास्थ्य के लिए घातक हैं तंबाकू-निकोटिन उत्पाद
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, तंबाकू और निकोटिन से बने उत्पाद मुंह के कैंसर, गले के कैंसर और आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचाने वाली कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों का कारण बनते हैं. खासकर बच्चे और युवा वर्ग इन उत्पादों की लत के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. सरकार का मानना है कि यह प्रतिबंध सार्वजनिक स्वास्थ्य की दिशा में एक जरूरी और निर्णायक कदम है.
21 जनवरी को जारी हुआ नोटिफिकेशन
राज्य सरकार ने 21 जनवरी को अधिसूचना जारी कर पूरे ओडिशा में तंबाकू और निकोटिन उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा की. इसके साथ ही सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे नए नियमों का पालन करें और तंबाकू मुक्त, स्वस्थ ओडिशा के निर्माण में सहयोग दें.
पहले भी लग चुका है बैन, फिर भी होती रही बिक्री
गौरतलब है कि ओडिशा सरकार ने वर्ष 2013 में भी तंबाकू और निकोटिन से बने उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया था. हालांकि, इसके बावजूद पड़ोसी और अन्य राज्यों से इन उत्पादों की तस्करी होती रही और राज्य में खुलेआम बिक्री जारी रही. यही वजह है कि सरकार को बार-बार सख्त कदम उठाने पड़े.
16 राज्यों से हो रहा था इंपोर्ट, हजारों करोड़ का रेवेन्यू
पिछले साल मार्च में विधानसभा में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बताया था कि ओडिशा में तंबाकू और पान मसाला जैसे उत्पाद 16 राज्यों से इंपोर्ट किए जा रहे थे. उन्होंने यह भी बताया कि बीते 11 वर्षों में इन उत्पादों की बिक्री से राज्य सरकार को कुल 6,596 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ.
10 साल में छह गुना बढ़ा तंबाकू से रेवेन्यू
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2014-15 में तंबाकू और पान मसाला की बिक्री से राज्य को 175 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला था, जो 2024-25 तक बढ़कर 1,048 करोड़ रुपये पहुंच गया. अब जब इन उत्पादों पर पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है, तो इसका असर राज्य के राजस्व पर भी पड़ सकता है.
22 जनवरी 2026 से सख्ती से लागू होंगे नए नियम
ओडिशा सरकार ने 22 जनवरी 2026 से इन नए नियमों को सख्ती से लागू करने का ऐलान किया है. इसके तहत बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, तंबाकू, खैनी और जर्दा समेत सभी तंबाकू-निकोटिन उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
स्वास्थ्य बनाम रेवेन्यू, सरकार ने चुनी सख्ती
सरकार का साफ कहना है कि रेवेन्यू से ज्यादा जरूरी लोगों की सेहत है. यह फैसला लंबे समय में कैंसर जैसी बीमारियों को कम करने और आने वाली पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने में मदद करेगा.
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