AI से तैयारी कर 2 बार क्रैक किया यूपीएससी, कैसे IAS बना यूपी के एक छोटे से गांव का लड़का

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए इन दिनों कोचिंग संस्थानों और मार्केट में स्टडी मैटिरियल की भरमार है। लेकिन उपलब्ध ऑनलाइन व ऑफलाइन स्टडी मैटिरियल, संसाधनों व स्त्रोतों का स्मार्ट तरीके से इस्तेमाल ही सफलता की राह पक्की करता है। यूपी के बुलंदशहर जिले के एक छोटे से कस्बे के रहने वाले विभोर भारद्वाज की कहानी आपको सिखाएगी कि कैसे अपने पास उपलब्ध संसाधनों का स्मार्ट तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए। विभोर ने एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल की मदद से दो बार यूपीएससी सीएसई क्रैक कर डाला। एआई वो टीचर है जो उनके पास चौबीसों घंटे मदद के लिए मौजूद था। एआई से जब चाहे वे मॉक इंटरव्यू दे सकते थे।
विभोर की स्ट्रैटिजी यह साबित करती है कि आज के जमाने में दुनिया के सबसे मुश्किल एग्जाम में से एक को पास करना सिर्फ कड़ी मेहनत नहीं है, बल्कि आपके पास मौजूद टूल्स के साथ स्मार्ट तरीके से काम करना है। आईएएस अफसर विभोर भारद्वाज किसी बड़े शहर से नहीं हैं। वह उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के एक छोटे से गांव उत्तरावली से ताल्लुक रखते हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में एमएससी करने के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जाम की तैयारी करना शुरू किया। कई अभ्यर्थियों की तरह उन्होंने सेल्फ-स्टडी और ऑनलाइन कोचिंग पर भरोसा किया।
फिजिक्स को बनाया ऑप्शनल
उन्होंने फिजिक्स को अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना और सटीक स्ट्रैटिजी बनाई। उन्होंने पिछले सालों के क्वेश्चन पेपर्स, डेली करेंट अफेयर्स और रेगुलर मॉक टेस्ट पर फोकस करके सिर्फ सात महीनों में पूरा यूपीएससी मेन्स का सिलेबस कवर कर लिया।
एआई था सीक्रेट हथियार
लेकिन उनका असली सीक्रेट हथियार टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल का स्मार्ट तरीका था। जहां हर कोई किताबों और ऑनलाइन वीडियो से पढ़ाई करता है, वहीं विभोर ने बने बनाए इस ढर्रे को तोड़कर एक नई राह चुनी। उन्होंने अपनी तैयारी को और पुख्ता करने के लिए खासकर पर्सनैलिटी टेस्ट (इंटरव्यू) के लिए, गूगल के जेमिनी जैसे एआई टूल्स का इस्तेमाल करना शुरू किया।
एआई चैटबॉट
उन्होंने मॉक इंटरव्यू करने के लिए एआई चैटबॉट का इस्तेमाल किया। एआई उनसे बिल्कुल असली इंटरव्यू पैनल की तरह कई तरह के सवाल पूछता था। हर सेशन के बाद वह अपने जवाबों को एनालाइज कर सकते थे। इससे उन्हें यह पहचानने में मदद मिली कि वह कहां कमजोर हैं और किन टॉपिक्स पर और काम करने की जरूरत है।
हमेशा उपलब्ध था एआई
जहां कोचिंग संस्थान के टीचर सीमित समय के लिए ही अभ्यर्थियों के पास उपलब्ध होते हैं, इसके ठीक उलट उनके एआई टीचर जब भी उन्हें प्रैक्टिस करने की जरूरत होती थी, उपलब्ध रहते थे। इस नए तरीके ने उन्हें एक खास बढ़त दी। वह अपने असली यूपीएससी सीएसई इंटरव्यू में डर के साथ नहीं, बल्कि तगड़े कॉन्फिडेंस के साथ गए। वह पहले ही सैकड़ों सवालों का सामना कर चुके थे, इससे उनका कॉन्फिडेंस लेवल काफी हाई हो गया था।
दो बार क्रैक किया यूपीएससी
इस स्मार्ट स्ट्रेटेजी के दम पर उन्होंने पहले 2022 में अपने पहले ही अटेम्प्ट में 743वीं रैंक के साथ यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की। लेकिन उनका इरादा आईएएस बनने का था। वे डटे रहे। फिर से एआई की मदद से तैयारी की और इस बार इस पर और भी ज्यादा भरोसा किया। 2024 में अपने अगले प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 19 हासिल की और आईएएस अफसर बनने का सपना पूरा किया। विभोर की कहानी बताती है कि कैसे यूपीएससी की तैयारी अब पारंपरिक स्त्रोतों और मॉडर्न इनोवेशन का मेल है।




