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केमिकल को कहें अलविदा, तंबाकू का देसी पेस्टीसाइड करेगा कीटों का जड़ से सफाया

सतना. ठंड का मौसम आते ही किसानों और बागवानी प्रेमियों की चिंता बढ़ जाती है क्योंकि इसी समय सब्जियों पर माहू, चेपा और अन्य हानिकारक कीटों का हमला तेज हो जाता है. रासायनिक पेस्टीसाइड जहां महंगे होते हैं, वहीं उनके दुष्प्रभाव भी लंबे समय तक मिट्टी और फसल पर पड़ते हैं. ऐसे में तंबाकू से तैयार देसी पेस्टीसाइड एक भरोसेमंद और सस्ता विकल्प बनकर सामने आया है, जिसे अपनाकर किसान न सिर्फ फसल को सुरक्षित रख सकते हैं बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान से बचा सकते हैं. तंबाकू में प्राकृतिक रूप से निकोटिन पाया जाता है, जो कीटों के लिए जहरीला होता है. यही कारण है कि तंबाकू से तैयार घोल का छिड़काव करने पर माहू, चेपा और रस चूसने वाले अन्य कीट जल्दी खत्म होने लगते हैं. खास बात यह है कि यह देसी पेस्टीसाइड सब्जियों की बढ़वार और उत्पादन पर नकारात्मक असर नहीं डालता. रासायनिक दवाओं की तुलना में यह उपाय मिट्टी की उर्वरता को भी सुरक्षित रखता है.

विशेषज्ञों के अनुसार, मौसम में नमी बढ़ने और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण माहू का प्रकोप तेजी से फैलता है. यह कीट धनिया, मसूर, मूली, मटर समेत कई सब्जियों और फसलों को अपनी चपेट में ले लेता है. माहू पौधों का रस चूसकर उन्हें कमजोर कर देता है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. अगर समय रहते नियंत्रण न किया जाए, तो पूरी फसल को नुकसान हो सकता है.

सतना निवासी पेस्टीसाइड एक्सपर्ट अमित सिंह बताते हैं कि इस देसी नुस्खे को तैयार करना बेहद आसान है. इसके लिए लगभग एक पाव देसी तंबाकू लें और उसे रातभर आधा लीटर पानी में भिगोकर छोड़ दें. अगले दिन इस घोल को अच्छी तरह छान लें. छाने हुए घोल को करीब 125 लीटर पानी में मिलाएं. इसके बाद इस मिश्रण को 15 लीटर क्षमता वाले पेस्टीसाइड पंप में भरकर एक एकड़ क्षेत्र में छिड़काव किया जा सकता है.

छिड़काव के बाद जल्दी दिखता है असर
इस देसी पेस्टीसाइड का छिड़काव करने के एक से दो दिन के भीतर ही खेत या बगिया में कीटों का प्रकोप कम होते हुए दिखने लगता है. लगातार निगरानी रखने पर यह साफ नजर आता है कि माहू और चेपा जैसी समस्याएं तेजी से खत्म हो रही हैं. जरूरत पड़ने पर 7 से 10 दिन के अंतराल में दोबारा हल्का छिड़काव किया जा सकता है.

बघेलखंड में वर्षों से आजमाया हुआ नुस्खा
बघेलखंड क्षेत्र में किसान पिछले वर्षों से तंबाकू के इस देसी पेस्टीसाइड का इस्तेमाल करते आ रहे हैं. यहां के किसानों का कहना है कि यह नुस्खा कम खर्च में बेहतर परिणाम देता है और रासायनिक दवाओं पर निर्भरता को कम करता है. साथ ही इससे सब्जियां अधिक सुरक्षित और स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर रहती हैं.

सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल समाधान
आज जब जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है ऐसे में तंबाकू से तैयार देसी पेस्टीसाइड किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है. बिना ज्यादा खर्च और अतिरिक्त मेहनत के यह उपाय ठंड के मौसम में भी सब्जियों को कीटमुक्त रखने में मदद करता है. किसान और बागवानी प्रेमी इसे अपनाकर न सिर्फ अपनी फसल बचा सकते हैं बल्कि रासायनिक पेस्टीसाइड से होने वाले नुकसान से भी छुटकारा पा सकते हैं.

Abhitab Namdeo

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