छत्तीसगढ़

रायपुर का बैजनाथपारा बना गुंडों, असामाजिक तत्वों का अड्डा, खुलेआम बिक रही बिरयानी

रायपुर। राजधानी का बैजनाथपारा एक बार फिर अराजकता और भय के साए में जी रहा है। कभी शांत और संभ्रांत माना जाने वाला यह मोहल्ला अब असामाजिक तत्वों, भू-माफियाओं और गुंडा तत्वों का गढ़ बन चुका है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि स्थानीय निवासी अब अपने पैतृक घरों को छोड़ने पर  मजबूर हैं। वजह है- महबूबिया चौक और इसके आसपास का इलाका जो हर रात दोबारा ‘जिंदा’ हो जाता है और सुबह तक अराजकता, नशा, धमकियां और ज़बरदस्ती का खेल चलता रहता है।रात 11 बजे के बाद जब शहर का बाकी हिस्सा सन्नाटे में डूब जाता है, तब बैजनाथपारा जागता है। महबूबिया चौक की सभी दुकानें— चाय, पान, बिरयानी, नॉनवेज स्टॉल्स— पूरी रात खुली रहती हैं। यहां तक कि कई स्टाल सड़क के बीचोंबीच लगे होते हैं, जिससे आवाजाही तक बाधित हो जाती है। इस दौरान असामाजिक तत्वों, शराबियों, नशेड़ियों और माफियाओं का जमावड़ा पूरे इलाके को डर के माहौल में धकेल देता है। स्थानीय लोगों की माने तो रात 2 बजे तक सड़कें गुलजार रहती हैं, लेकिन यह रौनक नहीं बल्कि अवैध गतिविधियों की गूंज होती

पुलिस की अनुपस्थिति और प्रशासन की चुप्पी
बीते दिसंबर में प्रशासन ने रात 10 बजे के बाद सभी दुकानें बंद करने का सख्त निर्देश दिया था। कुछ दिनों तक इस निर्देश का पालन हुआ, लेकिन जल्द ही स्थिति पहले से भी अधिक बेकाबू हो गई। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पुलिस की गश्त रात 11 बजे के बाद लगभग बंद हो जाती है। उसके बाद इलाके में “गुंडों का राज” शुरू हो जाता है। प्रशासन की नज़र से यह सब छिपा नहीं है, फिर भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुछ रसूखदार लोगों का संरक्षण इस अवैध गतिविधियों को मिल रहा है।
भू-माफियाओं का कहर
बैजनाथपारा के लोगों का सबसे बड़ा संकट है— भू-माफियाओं का आतंक। माफिया किसी की भी संपत्ति पर नज़र गड़ाए बैठे रहते हैं। रात के अंधेरे में दबाव, धमकी, और मारपीट के ज़रिये संपत्तियों को औने-पौने दामों में हड़प लिया जाता है। मजबूर लोग अपनी प्रॉपर्टी बेचकर दूसरी जगह शिफ्ट होने को विवश हैं। इतना ही नहीं, जबरदस्ती प्रॉपर्टी हथियाने के बाद माफिया उसे किराए पर चढ़ाकर या दुकानों का निर्माण कर ‘कब्जा’ पक्का कर लेते हैं।
सड़क पर अतिक्रमण और अवैध वसूली
महबूबिया चौक में स्थानीय छुटभैया नेता और उनके गुर्गे न केवल अतिक्रमण कर दुकानें लगवाते हैं, बल्कि उनसे रोजाना ₹1000 से ₹1500 की अवैध वसूली करते हैं। ठेले, होटल और स्टाल बीच सड़क पर लगवाकर आवागमन में परेशानी खड़ी की जाती है। कोई विरोध करता है तो गाली-गलौज और मारपीट होती है।
‘पायजामा छाप’ नेताओं की रंगदारी
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ तथाकथित नेता जो नाड़ा-पायजामा पहन कर खुद को इलाके का ‘ठेकेदार’ समझते हैं, न केवल वसूली करते हैं बल्कि दुकानदारों से मुफ्त में नॉनवेज, बिरयानी और अन्य सामान रंगदारी के रूप में लेते हैं। इनका समर्थन कुछ प्रभावशाली नेताओं से मिलने की बात सामने आई है, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हो पा रही। बैजनाथपारा में रहने वाले संभ्रांत परिवारों की स्थिति बहुत खराब है। रात में घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। सड़क पर अराजक तत्वों का बोलबाला है, तेज़ आवाज़ में डीजे और कानफोड़ू म्यूजिक ने नींद तक छीन ली है। स्थानीय महिलाएं और बुज़ुर्ग अब खुलेआम खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। कई परिवार तो इलाके को छोड़ने की तैयारी में हैं।
वैध-अवैध धंधों का केंद्र
बैजनाथपारा अब केवल नॉनवेज स्टॉल्स और बिरियानी होटलों तक सीमित नहीं है। यह जगह अब गांजा, चरस, अफीम, नशे की गोलियां और सिरप जैसी नशीली वस्तुओं के कारोबार का अड्डा बन चुका है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। रात के समय कई बार देखा गया है कि संदिग्ध लोग बाइक और गाड़ियों में आते-जाते रहते हैं। उनका कोई रिकॉर्ड नहीं, कोई पहचान नहीं और कोई पूछताछ नहीं होती। यह इलाके को अपराध की जड़ बना देता है। कई बार लोगों ने थाने में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन की निष्क्रियता बनी सबसे बड़ी समस्या
बैजनाथपारा की इस स्थिति के लिए केवल असामाजिक तत्व नहीं, बल्कि निष्क्रिय प्रशासन और सुस्त पुलिस भी जिम्मेदार है। नियमित गश्त की कमी, FIR दर्ज न करना, शिकायतों की अनदेखी और माफियाओं को मिली राजनीतिक शह ने हालात को बेकाबू बना दिया है। अब समय आ गया है कि बैजनाथपारा के नागरिक संगठित होकर अपनी आवाज़ बुलंद करें। मीडिया, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सोशल मीडिया के माध्यम से इस मामले को उठाएं। प्रशासन को सख्ती से इलाके की निगरानी करनी चाहिए, विशेष गश्त दल तैनात किया जाना चाहिए और अवैध स्टॉल्स, दुकानों और कब्जों को तुरंत हटाया जाना चाहिए।
Abhitab Namdeo

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