महिला दिवस स्पेशल: कमार महिला खम्मन बाई की पहल, महुआ बीनकर और टोकरी बेचकर स्कूल को दिया कंप्यूटर, हर ओर हो रही तारीफ

धमतरी: कहते हैं अगर दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो कोई भी परेशानी आड़े नहीं आती है. आप चाहे जिस स्थिति और परिस्थिति में हो अगर आपने समाज की दशा और दिशा बदलने की ठान ली हो और अगर आपके अंदर समाज के लिए योगदान देने का जज्बा हो तो आप उसे कभी भी पूरा कर सकते हैं. ऐसा ही कुछ धमतरी के सिंगपुर गांव की एक आदिवासी महिला खम्मन बाई कमार ने किया है. वो खुद अनपढ़ हैं उसके बावजूद उन्होंने गांव के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए बड़ा योगदान दिया है. उन्होंने अपनी कमाई से स्कूल में कंप्यूटर खरीदकर दिया है. अब इस महिला के अनोखी पहल की हर ओर सरहाना हो रही है.
जानिए किस स्कूल को संवार रही खम्मन बाई कमार ?
धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक में सिंगपुर गांव है. यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ है. जिला मुख्यालय से करीब 65 किलोमीटर दूर है वहीं मगरलोड ब्लॉक से 30 किलोमीटर की दूरी पर है. जंगल के बीच बने रास्तों से इस गांव में जाना पड़ता है. यहां एक सरकारी स्कूल है ज्यादातर यहां कमार जनजाति के लोग और आदिवासी समुदाय की जनसंख्या ज्यादा है. इस गांव में सिर्फ 12वीं तक की पढ़ाई के लिए एक मात्र स्कूल है. उच्च शिक्षा के लिए यहां के विद्यार्थियों को लंबी दूरी तय करके कॉलेज जाना पड़ता है. खम्मन बाई कमार इसी स्कूल के लिए अथक मेहनत कर सामान खरीदकर दान करती हैं
गांव के बच्चों को शिक्षित करने का सपना
महिला खम्मन बाई कमार खुद अनपढ़ हैं लेकिन वे गांव के बच्चों को शिक्षित देखना चाहती है. उनके इस पहल से न सिर्फ गांव के लोग खुश हैं, बल्कि जिला प्रशासन भी उनकी तारीफ कर रहा है. इस महिला का काम महुआ बीनकर बेचना, बांस की टोकरी बनाकर बेचना और जंगल से तेंदूपत्ता तोड़कर लाना है. अथक मेहनत के बाद यह महिला अपनी कमाई के हिस्से से स्कूल में सामान दान करती हैं. इस सबके पीछे उनका सिर्फ एक मकसद है कि गांव के बच्चे और आने वाली पीढ़ी शिक्षित हो.लोग शिक्षा के प्रति जागरूक हो इसलिए मैं अपनी मेहनत से स्कूल में सामान दान करती हूं. गांव की भावी पीढ़ी आगे बढ़ सके और पढ़ाई लिखाई के बाद अपना भविष्य बना सकें-खम्मन बाई कमार, स्कूल में सामान दान देने वाली महिला
स्कूल को मदद पहुंचाना जीवन का हिस्सा- खम्मन बाई कमार
सिंगपुर कमारपारा में रहने वाली 50 वर्षीय खम्मन बाई कमार की विशेषता यह है कि वह अपने जनजाति में होने वाले पारंपरिक कार्य को कर रही है.खम्मन बाई झोपड़ी नुमा घर मे रहती है. उनके दो पुत्र और 1 बेटी है. पति की वर्ष 2008 में ही बीमारी के चलते देहांत हो गया था. खम्मन बाई की सोच शिक्षा के प्रति अलग ही है.उनका कहना है कि वह अपने घर को चलाने के साथ ही गांव के स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को पढ़ाई के प्रति जागरूक करना चाहती है.इसलिए वे स्कूल में नए नए सामान अपने पैसों से खरीदकर देती हैं. यह उनके जीवन का अब हिस्सा सा बन गया है.
सिंगपुर स्कूल के बच्चे बेहद खुश
स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी विद्यालय में बच्चों को एक नया कंप्यूटर लेकर खम्मन बाई ने दिया है. स्कूली बच्चे कंप्यूटर पर पढ़ाई कर रहे हैं. गांव के स्कूली बच्चे अब हाई एजुकेशन यानी कंप्यूटर की बेसिक जानकारी हासिल कर रहे हैं. यहां के बच्चों और शिक्षकों का कहना है कि खम्मन बाई की इस पहल से न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति आएगी बल्कि गांव के बच्चे एक अच्छे एजुकेशन से जुड़ पाएंगे. बच्चों का कहना है कि दादी ने उन्हें कंप्यूटर गिफ्ट दिया है और मन लगाकर पढ़ने को कहा है.
मैं पढ़ी-लिखी नहीं हूं. मेरा उद्देश्य है कि गांव में जो दुनिया बैठी है वह मुझे देखकर जागरूक हो. मेरा स्कूल अच्छा बने यही सोच है. इस वजह से मैं दान दक्षिणा करती हूं. 2 साल के बाद मैं फिर एक बड़ा गिफ्ट देने वाली हूं. वह मैं आप लोगों को नहीं बताऊंगी- खम्मन बाई कमार, स्कूल में सामान दान देने वाली महिला
हमें खम्मन बाई कमार दादी ने कंप्यूटर दिया है. कंप्यूटर पाकर हम बेहद खुश हैं. इससे हमें पढ़ाई लिखाई में मदद मिलेगी- योगबाला दीवान, छात्रा
गांव के स्कूली बच्चे अब हाई एजुकेशन आसानी से प्राप्त कर सकेंगे. इस पहल से सिंगपुर इलाके की शिक्षा में क्रांति आएगी. गांव के बच्चे एक अच्छे एजुकेशन से जुड़ पाएंगे- आरके साहू, व्याख्याता, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी विद्यालय, सिंगपुर
जो परेशानी मैंने देखी, वो आने वाली पीढ़ियां न देखे
खम्मन बाई ने आगे कहा कि वह पिछले कई वर्षों से स्कूलों में बाल्टी, बच्चों के लिए पुस्तक दे चुकी है. टीवी और कंप्यूटर भी दे चुकी हैं. मेरा बाल विवाह हुआ था, मुझे कुछ पता नहीं था स्कूल में क्या होता है यह जानकारी नहीं थी. मैं इस गांव के बच्चों को जागरूक इंसान बना कर रहूंगी. कम से कम आने वाली पीढ़ी जाने और समझे. खम्मन बाई ने बताया कि अभी महुआ बिनने का सीजन आ गया है इसके साथ ही तेंदूपत्ता, टोकरी का भी काम चल रहा है.
आमदनी मत पूछिए मैं हर चीज खरीद कर करती हूं. चाहे 2 रूपए मुझे आमदनी हो या 1 रुपए, जो मेरे पेट से बच जाता है उसे मैं पढ़ाई के लिए खर्च करती हूं. मुझे स्कूल के बच्चों को पढ़ते हुए देखकर काफी खुशी मिलती है. मुझे बच्चे झुक कर प्रणाम करते हैं, दादी और नानी कहते हैं- खम्मन बाई कमार, स्कूल में सामान दान देने वाली महिला
खम्मन बाई ने सरकार से कॉलेज के लिए अपील की
खम्मन बाई ने हमारे चैनल के माध्यम से सरकार को अपील किया है कि गांव में स्कूल अच्छा होना चाहिए. इस गांव में कॉलेज खुलने चाहिए मेरे बच्चों के लिए, लड़कियों को बहुत तकलीफ हो जाता है. लड़के कहीं भी आ और जा सकते हैं लेकिन लड़कियां नहीं आ जा सकती, तकलीफ होती है. मेरी सरकार से मांग है कि गांव में एक कॉलेज खोल दे मैं धन्यवाद दूंगी.
जिला प्रशासन ने खम्मन बाई के कार्य को सराहा
धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने खम्मन बाई कमार के सहयोग की सराहना की है. उन्होंने कहा कि खम्मन बाई द्वारा किये जा रहा कार्य पूरे देश और प्रदेश के लिए महिला सशक्तिकरण का एक उदाहरण है. वह पढ़ी-लिखी नहीं है इसके बावजूद बच्चों के लिए स्मार्ट टीवी, कंप्यूटर दिया है.उन्होंने लाइब्रेरी के लिए पुस्तक भी डोनेट किया है. ट्राइबल हॉस्टल में भी उनकी भूमिका रही है. कमार जनजाति को पिछड़ा माना जाता है लेकिन वह शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर काम कर रही हैं यह बहुत ही सराहनीय है.
सिंगपुर गांव का जो आईटीआई और कॉलेज का जो प्रपोजल है उसे राज्य शासन भेजा गया है. यहां जल्द कॉलेज और आईटीआई खुलेगा- अबिनाश मिश्रा, कलेक्टर, धमतरी
कलेक्टर ने कहा कि धमतरी से गांव काफी दूर है. मगरलोड से यह 30 किलोमीटर की दूरी पर है. सिंगपुर में हाई एजुकेशन का साधन नहीं है इसलिए वहां पर प्रयास किया जा रहा है कि कॉलेज खोला जाए. कलेक्टर ने कहा कि जो महिलाएं अपने कार्य के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार कर रही हैं उन्हें जिला प्रशासन की तरफ से बहुत सारी शुभकामनाएं.



