अब तक प्रोफाइल किए गए 1.52 लाख कचरा बीनने वालों में से 84.5% एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों से

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने मंगलवार (3 फरवरी) को पहली बार देश भर में कचरा बीनने वालों की चल रही गणना से जुड़े आंकड़े जारी किए. इन आंकड़ों के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक कुल 1.52 लाख ऐसे कामगारों का प्रोफाइल तैयार कर उन्हें सत्यापित किया जा चुका है.
, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने यह आंकड़े मंगलवार (3 फरवरी) को संसद में पेश किए. यह गणना मंत्रालय की ‘नमस्ते’ (NAMASTE) योजना का हिस्सा है, जिसके तहत देश भर में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई करने वाले कर्मियों तथा कचरा बीनने वालों की पहचान की जा रही है, ताकि उन्हें शहरी स्थानीय निकायों द्वारा औपचारिक रूप से मान्यता दी जा सके और उन्हें सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जा सकें.
इस योजना का उद्देश्य सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई के कारण होने वाली मौतों को समाप्त करना है.
आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर कुल कचरा बीनने वालों में 84.5% अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदायों से हैं, जबकि 10.7% सामान्य (जनरल) श्रेणी के समुदायों से हैं.
हालांकि, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर कुछ अपवाद भी देखने को मिले हैं, जहां सामान्य श्रेणी के कचरा बीनने वालों की संख्या एससी, एसटी और ओबीसी को मिलाकर भी अधिक है. उदाहरण के तौर पर दिल्ली और गोवा में सामान्य श्रेणी के समुदायों से आने वाले कचरा बीनने वाले, एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों से आने वालों से अधिक हैं.
पश्चिम बंगाल में प्रोफाइल और सत्यापित किए गए कुल कामगारों में से 42.4% सामान्य श्रेणी के थे.
आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 23 जनवरी तक इस कवायद के तहत शहरी स्थानीय निकायों द्वारा कुल 1.52 लाख कचरा बीनने वालों का प्रोफाइल तैयार कर उन्हें सत्यापित किया जा चुका था. इनमें से करीब 48.7% महिलाएं (74,427), 51.3% पुरुष (78,374) और 0.007% ट्रांसजेंडर व्यक्ति (12) हैं.
श्रेणी के अनुसार आबादी
सामाजिक श्रेणी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, प्रोफाइल किए गए कुल कामगारों में से 60.3% एससी समुदायों से (92,089), 13.7% ओबीसी समुदायों से (20,954) और 10.5% एसटी समुदायों से हैं. वहीं, 16,329 कचरा बीनने वाले (10.7%) ऐसे समुदायों से हैं जिन्हें सामान्य श्रेणी में रखा गया है.
हालांकि, दिल्ली और गोवा में अधिकांश कचरा बीनने वाले सामान्य श्रेणी से हैं. दिल्ली में प्रोफाइल किए गए 6,500 से अधिक कचरा बीनने वालों में से 4,289 इसी श्रेणी से थे. गोवा में भी स्थिति कुछ ऐसी ही रही, जहां कुल 1,286 प्रोफाइल किए गए कामगारों में से 729 सामान्य श्रेणी के समुदायों से थे.
‘नमस्ते’ योजना के तहत कचरा बीनने वालों को ऐसे लोगों के रूप में परिभाषित किया गया है, जो ‘अनौपचारिक रूप से’ सड़कों, कूड़ेदान, मटेरियल रिकवरी सुविधाओं, प्रोसेसिंग और कचरा निपटान सुविधाओं से दोबारा इस्तेमाल होने वाले और रिसाइकल होने वाले ठोस कचरे को इकट्ठा करने और निकालने का काम करते हैं, ताकि वे सीधे रिसाइकल करने वालों को या बिचौलियों के ज़रिए बेचकर अपनी रोज़ी-रोटी कमा सकें.
‘अन्य’ श्रेणी
राज्य मंत्री (सामाजिक न्याय) रामदास अठावले द्वारा संसद में रखे गए इन आंकड़ों में यह भी बताया गया कि 7,402 कामगार ‘अन्य’ समुदायों से हैं. यह जानकारी डीएमके के इरोड से सांसद केई प्रकाश द्वारा ‘नमस्ते’ योजना पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में दी गई थी, जिसमें हाल ही में कचरा बीनने वालों की गणना को भी योजना के उद्देश्यों में शामिल किया गया है.
इस योजना के तहत अब तक करीब 89,000 सीवर में उतरकर काम करने वाले और सेप्टिक टैंक साफ़ करने वाले कर्मियों की गणना की जा चुकी है, जिनमें से 95.8% पुरुष हैं.
दिसंबर 2024 के संसद आंकड़ों के अनुसार, तब तक प्रोफाइल किए गए सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई कर्मियों में 91.95% एससी, एसटी और ओबीसी पृष्ठभूमि से थे, जबकि करीब 8.05% सामान्य श्रेणी के समुदायों से थे. हालांकि, उस समय के राज्य-स्तरीय आंकड़े अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.
2014 से अब तक 859 मौतें
लोकसभा में मंगलवार को एक अन्य सवाल के जवाब में सामाजिक न्याय मंत्रालय ने बताया कि 2014 से अब तक देश भर में सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई के दौरान कुल 859 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 43 मौतें 2025 में हुईं.
सीवर और सेप्टिक टैंक मज़दूरों के हिस्से के तहत यह योजना सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई से सीधे जुड़े मज़दूरों को शामिल करती है, जिसमें डीस्लजिंग वाहनों के ड्राइवर, हेल्पर, मशीन ऑपरेटर और क्लीनर शामिल हैं.




