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ऑस्ट्रेलिया में आग बरसाती धूप, यूरोप में बर्फीला तूफान… दुनिया झेल रही मौसम का कहर

देश और दुनिया में मौसम का मिजाज बदलता नजर आ रहा है. भारत में पिछले साल 2025 में पहाड़ों पर बर्फबारी में कमी आई है. मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर के मुताबिक, जहां पश्चिमी विक्षोभ आमतौर पर अक्टूबर मध्य से पश्चिमी हिमालय को प्रभावित करना शुरू कर देते हैं. नवंबर से बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू हो जाता है और दिसंबर में एक-दो शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ मध्यम से भारी बर्फबारी कराते हैं. लेकिन 2025 में ऐसा नहीं देखने को मिला है. इससे पहले साल 2024 में भी इसी तरह का शुष्क पैटर्न देखने को मिला था.स्काईमेट वेदर के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों में भीषण हीट वेव ने दस्तक दी है. दक्षिण ऑस्ट्रेलिया, विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स के उत्तरी हिस्सों में तापमान 47°C तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में चल रही हीट वेव ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. कई जगहों पर तापमान 50°C के करीब पहुंच गया है.राज्य के उत्तरी तट पर स्थित ऑनस्लो एयरपोर्ट पर 7 जनवरी को पारा 49°C तक पहुंचा है. हालांकि यह ऑस्ट्रेलिया या राज्य का अब तक का सबसे अधिक तापमान नहीं था, लेकिन ऑनस्लो एयरपोर्ट उस दिन दुनिया का सबसे गर्म स्थान बन गया. मेलबर्न में भी 2020 के बाद का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया.यहां के अधिकांश हिस्सों पर असर डाला है. पूरे उत्तरी यूरोप में भी बर्फबारी देखी गई. यहां हवाई अड्डों के रनवे बंद करने पड़े और फ्लाइट ऑपरेशंस पर भी असर हुआ है. इससे उड़ानों का संचालन बाधित हुआ. नीदरलैंड्स में रेल और सड़क नेटवर्क बर्फ और खराब मौसम की चपेट में आया है. तूफान का असर फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, फिनलैंड और वेल्स तक दिखाई दिया, जहां बर्फीले तूफान और कड़ाके की ठंड ने हालात और बिगाड़ दिए

Abhitab Namdeo

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