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अगले 4 दिन में 15 राज्य भीगेंगे; बेमौसम बरसात का फसलों और सर्दी पर क्या असर

देश से मानसून 15 अक्टूबर को ही विदा हो गया, लेकिन बादल न जाने की जिद पर अड़े हैं। इस वक्त देश के 90% हिस्सों में बादल छाए हैं या हल्की सी मद्धम बारिश हो रही है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 4 दिन में 15 राज्य इस बेमौसम बारिश से भीगेंगे।

आखिर मानसून के बाद कहां से आई इतनी बारिश, ये राहत लाई है या मुसीबत और क्या इसके बाद सर्दी भी जल्दी दस्तक देगी; भास्कर एक्सप्लेनर में 5 जरूरी सवालों के जवाब…

सवाल-1: देश भर में इस वक्त कहां-कहां बारिश हो रही है?

जवाब: पिछले 24 घंटों में देश के 14 से ज्यादा प्रदेशों में हल्की, मद्धम या भारी बारिश हुई है। मौसम विभाग ने ये आंकड़ा 27 अक्टूबर की सुबह 8.30 बजे जारी किया है।26-27 अक्टूबर को गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गोवा और आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में 7 सेमी या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

सवाल-2: मानसून की विदाई के बाद भी इतनी बारिश की क्या वजहें हैं?

जवाब: मौसम विभाग के मुताबिक भारत में अभी तीन मौसमी सिस्टम एक्टिव हैं, जिसकी वजह से मानसून की विदाई के बाद भी देश भर में बारिश हो रही है…

पहला सिस्टमः बंगाल की खाड़ी में मोन्था चक्रवात

  • बंगाल की खाड़ी के ऊपर 27 अक्टूबर को मोन्था चक्रवात एक्टिव हुआ है। यह आंध्र प्रदेश और ओडिशा की तरफ बढ़ रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक 28 अक्टूबर तक यह गंभीर चक्रवात बन जाएगा।
  • इस दौरान अधिकतम 90-100 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलेंगी, जो बढ़कर 110 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। यह सिस्टम 29 अक्टूबर को कमजोर होगा।
  • यह आंध्र प्रदेश के मछली पट्टनम और कलिंगापट्टनम के बीच काकीनाडा के आसपास तट से टकराएगा। मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों और अंडमान निकोबार के लिए चेतावनी जारी की है।

दूसरा सिस्टमः अरब सागर में डिप्रेशन

  • अरब सागर में एक डिप्रेशन एक्टिव है। यह गुजरात की तरफ बढ़ने के बजाय तटों से दूर जा रहा है, जिससे गुजरात के कुछ जिलों के लिए अगले 24 घंटे रेड अलर्ट जारी है।
  • यह सिस्टम अभी अरब सागर में अटका हुआ है और इसे यहां से दक्षिण-पूर्व की ओर निकलने में अगले 24 घंटे लगेंगे।
  • इस सिस्टम की वजह से कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा के तटीय इलाकों में बारिश हो रही है।

तीसरा सिस्टमः वेस्टर्न डिस्टर्बेंस

  • मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ सोमवार को उत्तरी हिमालय के पहाड़ी राज्यों में दस्तक देने वाला है। इससे पहाड़ों पर बर्फबारी के साथ ही नवंबर के पहले हफ्ते में 3-4 डिग्री तापमान गिर सकता है।

    भारत के पूर्व, पश्चिम और उत्तर में तीन सिस्टम एक्टिव होने का असर अगले 3-4 दिनों तक दिखेगा। मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत के मुताबिक इन तीनों सिस्टम की नमी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ राजस्थान और गुजरात तक आ रही है। इस वजह से इन इलाकों में बारिश हो रही है और अगले कुछ दिन ऐसा ही मौसम बना रहेगा। मौसम विभाग ने मोन्था चक्रवात और अरब सागर में बने सिस्टम की वजह से तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    सवाल-3: अगले कुछ दिन कैसा रहेगा मौसम का मिजाज?

    जवाब: मौसम विभाग के मुताबिक 30 अक्टूबर तक देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश होगी। इसके बाद आने वाले कुछ दिन सिर्फ उत्तर-पूर्वी राज्यों में बारिश रहेगी। 26 अक्टूबर को जारी मौसम विभाग का पूर्वानुमान बताता है…

    • पश्चिमी मध्य प्रदेश में 27-28 अक्टूबर और पूर्वी मध्य प्रदेश में 29-30 अक्टूबर को तेज बारिश की संभावना है।
    • महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में 28 से 30 अक्टूबर और छत्तीसगढ़, ओडिशा में 27 से 30 अक्टूबर और बिहार, झारखंड में 29 से 31 अक्टूबर तक तेज बारिश होगी।
    • पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी 31 अक्टूबर तक तेज बारिश का दौर जारी रहेगा।
    • गुजरात और राजस्थान में भी 27-28 अक्टूबर का अनुमान है। कच्छ में 30 अक्टूबर और सौराष्ट्र में 29 अक्टूबर तक तेज बारिश होगी।
    • पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गरज-चमक के साथ 27 अक्टूबर को बारिश होगी, लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश में 31 अक्टूबर तक बारिश का मौसम बना रहेगा। पूर्वी राजस्थान में भी अगले चार दिन बारिश रहेगी।
    • दक्षिण भारत के ज्यादातर इलाकों में 29 अक्टूबर तक गरज-चमक के साथ तेज बारिश होगी। मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक के तटीय इलाकों के लिए चेतावनी भी जारी की है।

      सवाल-4: इस बेमौसम बरसात से फसलों पर क्या असर पड़ेगा?

      जवाब: यह बारिश सिर्फ मौसम नहीं, किसानों की कमाई पर भी असर डाल सकती है। अभी रबी की फसल की बुवाई और खरीफ फसलों की कटाई का समय है। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च यानी ICAR के डायरेक्टर डॉ. जी. पी. सिंह के मुताबिक बेमौसम बरसात से 3 बड़े असर पड़ेंगे…

      1. बुवाई में देरी से हर दिन 40 किलो गेहूं का नुकसान

      • उत्तर भारत में अक्टूबर से दिसंबर के बीच गेहूं की फसल बोई जाती है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अभी गेहूं की बुवाई शुरू नहीं हुई है, लेकिन इस हफ्ते बुवाई शुरू होनी थी।
      • बारिश की वजह से खेत गीले हो जाएंगे, जिससे बुवाई में देरी हो सकती है। अगर 2-3 दिन सामान्य बारिश हो तो बहुत असर नहीं पड़ेगा।
      • वहीं अगर ज्यादा दिन बारिश होती है और 15 नवंबर तक बुवाई नहीं हो पाती है तो हर दिन 40 किलोग्राम गेहूं का नुकसान होगा।
      • दरअसल, ICAR गेहूं की गुणवत्ता के हिसाब से अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में बोए जाने वाले अलग-अलग बीज बनाता है। अगर अक्टूबर में बोए जाने वाला बीज मिड-नवंबर तक भी न बोया जाए तो उसकी उपज प्रभावित हो जाती है।

      2. अभी चने की फसल को फायदा, ज्यादा बारिश से खतरा

      • मध्य प्रदेश में रबी सीजन में चने और गेहूं की फसल की बुआई होती है। यहां ट्रेंड है कि जब बारिश अच्छी होती है तब किसान चने की फसल ज्यादा लगाते हैं और जब बारिश कम होती है तो गेहूं की।
      • इस साल बारिश अच्छी हुई है, इसलिए ज्यादा किसान चने की बुवाई कर रहे हैं जो अब तक हो चुकी होगी।
      • 2-3 दिन की सामान्य बारिश से चने की फसल प्रभावित नहीं होगी, उल्टा उसे फायदा ही होगा, लेकिन अगर ज्यादा बारिश हो जाए और खेतों में जलभराव होने लगे तो किसानों के लिए समस्या बढ़ जाएगी।

      3. चावल के भंडारण में दिक्कत होगी

      • दक्षिण भारत में अभी चावल की फसलों की कटाई का समय है। ज्यादातर फसलों की कटाई हो चुकी होगी। अगर कोई फसल कटनी बाकी है तो बेमौसम बरसात से उसे नुकसान होगा।
      • दूसरी तरफ जो फसल कट चुकी है, उनके लिए अगर स्टोरेज की सही सुविधा नहीं होगी तो फसलों में नमी आ जाएगी।
      • मंडी में व्यापारी किसानों से ज्यादा नमी आए चावल नहीं खरीदेंगे जिससे डिमांड-सप्लाई चेन में समस्या आ जाएगी और चावल के दाम बढ़ सकते हैं।

        एग्री ट्रेड एक्सपर्ट विजय सरदाना बताते हैं कि इस समय सरसों, सभी तरह की दालें, सब्जियों और फलों की भी खेती होती है। जो किसान बुवाई कर चुके हैं, वह बारिश की वजह से डैमेज हो जाएगा। किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ेगी, जिससे नुकसान होगा।

        सवाल-5: क्या इस बारिश के बाद अब ठंड ज्यादा पड़ेगी?

        जवाब: एक्सपर्ट मानते हैं कि अच्छी बारिश से ठंड भी अच्छी पड़ती है। बारिश से जमीन का तापमान ठंडा हो जाता है जिसकी वजह से ठंड भी ज्यादा पड़ती है। हालांकि यह सिर्फ एक फैक्टर नहीं है जिस पर ठंड निर्भर करती है।

        इस बार ला-नीना के चलते वैसे ही ज्यादा ठंड पड़ने का अनुमान है। नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन यानी NOAA ने कहा है कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच ला नीना के बनने की 71% संभावना है, जबकि दिसंबर से फरवरी के बीच यह संभावना 54% रहेगी।

        एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि ये भूमध्य सागर से उठने वाले बर्फीले तूफान यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस को और मजबूत बनाएगा। इससे उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में बहुत ज्यादा बर्फबारी होगी और मैदानी इलाकों में ठंडी हवाएं चलेंगी, कोहरा और धुंध बनी रहेगी।

Abhitab Namdeo

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